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बुजुर्गों, महिलाओं और बहुत सारे शुरुआती लक्षण वाले मरीजों में 'लॉन्ग कोविड' का खतरा का सबसे ज्यादा, अध्ययन में खुलासा

Thu, 22 Oct 2020 10:09 AM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
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कोविड 19 के मरीजों की देखभाल के लिए गहन चिकित्सा इकाई में तैनात चिकित्सा कर्मी - फोटो : PTI
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बुजुर्ग लोगों, महिलाओं और जिनमें बीमारी के पहले हफ्ते में लक्षणों की एक विस्तृत श्रृंखला पाई जाती है, उन लोगों में "लॉन्ग कोविड" विकसित करने की सबसे अधिक संभावना है। बुधवार को किंग्स कॉलेज लंदन में शोधकर्ताओं द्वारा प्रकाशन से पहले ऑनलाइन पोस्ट किए गए एक अध्ययन में यह जानकारी दी गई है। 

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जिन मरीजों में लक्षण चार हफ्ते से ज्यादा समय तक बने रहते हैं, उन्हें यह अध्ययन "लॉन्ग कोवि़ड" के रूप में परिभाषित करता है। जबकि कोविड की एक छोटी अवधि को 10 दिनों से भी कम समय के रूप में परिभाषित किया गया था, जिसमें दोबारा संक्रमण न हो। 



कोविड लक्षण अध्ययन एप के आंकड़ों का पूर्व विश्लेषण करने से पता चलता है कि, कोविड-19 से संक्रमित लगभग हर 20 में से एक व्यक्ति या 4.5 फीसदी मरीजों में, आठ सप्ताह या उससे अधिक समय तक लक्षणों का अनुभव होने की संभावना है। इस विश्लेषण को अभी किसी बड़ी समीक्षा की पत्रिका में प्रकाशित नहीं किया गया है। 
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रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने मई में इंग्लैंड के सरे में एक परिवर्तित पुराने सैन्य अस्पताल सीकोल सेंटर में भर्ती होने वाले पहले रोगियों के बारे में अपनी टिप्पणियों को दर्ज किया था। 

अध्ययन में शामिल किए गए डेटा को ब्रिटेन में इस एप को इस्तेमाल करने वाले 4,182 यूजर्स से इकट्ठा किया गया था, जो कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे और नियमित रूप से एप में अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दर्ज कर रहे थे। 

जब रिपोर्ट किए गए लक्षणों की विस्तृत जानकारी का अनुसंधान किया गया तो लॉन्ग कोविड से पीड़ितों के दो मुख्य समूहों की पहचान की गई। एक समूह ने मुख्य रूप से सांस लेने संबंधी लक्षणों को महसूस किया, जैसे कि खांसी और सांस की तकलीफ, साथ ही थकान और सिरदर्द। दूसरे समूह ने शरीर के कई हिस्सों में "मल्टी-सिस्टम" लक्षणों का अनुभव किया, जैसे कि दिल की धड़कन, आंत के मुद्दे, पिन और सुई या सुन्नता, और "मस्तिष्क में भारीपन।"

किंग्स कॉलेज लंदन के नैदानिक अकादमिक और वरिष्ठ लेखक डॉ. क्लेयर स्टीवस ने एक समाचार विज्ञप्ति में कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि हम महामारी की पहली लहर के दौरान मिले ज्ञान का उपयोग दूसरे लहर के दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने के लिए करें। इससे दीर्घकालिक प्रभावों को कम करने के लिए शुरुआती हस्तक्षेप के परीक्षणों का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए।" 

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