वैश्विक स्तर पर परमाणु निरस्त्रीकरण की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। ईरान पर देशों की आपसी गुटबाजी ने परमाणु अप्रसार संधि को कमजोर कर दिया है। वहीं, पश्चिम एशिया में हिजबुल्ला की आक्रामकता लेबनान की स्थिरता को सीधे चुनौती दे रही है, जिससे वैश्विक सुरक्षा का संकट और गहरा गया है।
परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन 2026 किसी अंतिम सहमति के बिना समाप्त हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस विफलता पर गहरा दुख जताया है। अमेरिका ने कुछ सदस्य देशों की कड़ी आलोचना की है। उसका कहना है कि ये देश वैश्विक परमाणु सुरक्षा के लिए ईरान के खतरे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यह सम्मेलन आयोजित हुआ था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक प्रतिनिधि किसी अंतिम दस्तावेज पर मुहर नहीं लगा सके।
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ईरान के रवैये पर अमेरिका सख्त
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ईरान की परमाणु गतिविधियों पर चिंता जताई है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईऐईए) के नियमों का उल्लंघन कर रहा है। वह बिना किसी ठोस नागरिक कारण के अपनी परमाणु गतिविधियों को लगातार तेज कर रहा है। अमेरिका ने साफ-साफ कहा कि अगर एनपीटी को प्रासंगिक बनाए रखना है, तो सदस्य देश ईरान के इस रवैये से अपनी आंखें नहीं मूंद सकते। नियमों का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेही से बचने की छूट नहीं दी जा सकती।
एनपीटी के भविष्य पर मंडराया संकट
सम्मेलन के अध्यक्ष डो हंग विएत ने बैठक में किसी भी आम सहमति के न बन पाने की पुष्टि की। यह लगातार तीसरी बार है जब पांच साल में होने वाला यह सम्मेलन बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हुआ है। पिछले 16 वर्षों से इस संधि के नियमों को मजबूत करने की कोई कोशिश सफल नहीं हुई है। अब अगला समीक्षा सम्मेलन सीधे 2031 में होगा। संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण प्रमुख इजुमी नाकामित्सु ने भी इस विफलता को बेहद गंभीर बताया है।
लेबनान में हिजबुल्ला की नई चुनौती
इस वैश्विक परमाणु विवाद के बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने लेबनान संकट पर बड़ा बयान दिया है। अमेरिका ने हिजबुल्ला की ओर से लेबनान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराने की कोशिशों की कड़े शब्दों में निंदा की है। रूबियो ने कहा कि हिजबुल्ला लगातार युद्धविराम के प्रस्तावों को ठुकरा रहा है। वह दक्षिणी लेबनान में लड़ाके और हथियार भेजकर इस्राइल पर हमले कर रहा है। अमेरिका ने कहा है कि वह लेबनान की वैध सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है और किसी आतंकी संगठन को पूरे देश को बंधक बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।