अमेरिका में चुनाव नतीजों को चुनौती देने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आमादा रहने के कारण अब सबकी निगाहें आठ दिसंबर पर टिक गई हैं। ये वो अहम तारीख है, जिस रोज तक अमेरिका के सभी राज्यों के चुनाव नतीजों का प्रमाणित होना जरूरी है। इसी रोज अंतिम रूप से इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों का औपचारिक एलान होता है। अमेरिकी प्रणाली के मुताबिक इलेक्टोरल कॉलेज की बैठक 14 दिसंबर को होती है, जिस रोज इसके सदस्य राष्ट्रपति का औपचारिक रूप से चुनाव करते हैं।
आम तौर पर इलेक्टोरल कॉलेज के निर्वाचित सदस्यों को प्रमाणित करने की प्रक्रिया महज एक रस्म-अदायगी मानी जाती है। लेकिन इस साल ये महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि ट्रंप की कानूनी टीम ने नतीजों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में रुकावट डाल दी है। अमेरिकी चुनाव प्रणाली के मुताबिक अगर किसी वजह से 8 दिसंबर तक चुनाव नतीजे को प्रमाणित करने की प्रक्रिया पूरी ना हो पाए, तो फिर संबंधित राज्य की विधायिका इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों को मनोनीत कर सकती है।
इसीलिए ट्रंप टीम की रणनीति प्रमाणित करने की प्रक्रिया में देर करने की है। दो अहम राज्यों- मिशिगन और पेंसिल्वेनिया- की विधायिका में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। ट्रंप टीम की सोच यह है कि अगर 8 दिसंबर तक किसी तरह चुनाव नतीजों को प्रमाणित ना होने दिया जाए, तो फिर यहां कि विधायिकाएं ट्रंप समर्थक सदस्यों को इलेक्टोरल कॉलेज में मनोनीत कर देंगी। इन दोनों राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी जो बाइडेन की जीत हुई है और पूरे चुनाव नतीजे के लिहाज से यहां के परिणाम महत्वपूर्ण हैं।
अमेरिकी चुनाव प्रणाली के मुताबिक जनवरी में जब नव-निर्वाचित कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की पहली बैठक होती है, तो वह इलेक्टोरल कॉलेज में हुए मतदान की गिनती करती है। इस दौरान वह इलेक्टोरल कॉलेज सिर्फ उन्हीं सदस्यों के वोटों को गिन सकती है, जिन्हें 8 दिसंबर के पहले संबंधित राज्यों से प्रमाणित कर दिया गया हो।
अगर इस समयसीमा तक इलेक्टोरल कॉलेज के निर्वाचित सदस्य प्रमाणित ना किए गए हों, तो फिर कांग्रेस को राज्य की विधायिका की तरफ से मनोनीत सदस्यों के वोट को स्वीकार करना होगा। इसका मतलब यह हुआ कि अगर 8 दिसंबर तक सभी राज्यों में चुनाव प्रमाणित करने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो फिर ट्रंप टीम की सारी कोशिशें नाकाम हो जाएंगी।
कई महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव नतीजों को प्रमाणित करने की प्रक्रिया इसी हफ्ते पूरी होने वाली है। इनमें पेंसिल्वेनिया भी है। यहां चुनाव नतीजों को राज्य स्तर पर प्रमाणित नहीं किया जाता। बल्कि काउंटी (जिला) स्तर पर ये काम होता है। राज्य में कुल 67 काउंटियां हैं। ये सभी अलग-अलग अपने यहां हुए मतदान के आधार पर ये प्रक्रिया पूरी करेंगी।
ये प्रक्रिया पूरी होने के बाद हर काउंटी अपना नतीजा राज्य के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट को भेजेंगी। तब सेक्रेटरी ऑफ स्टेट विजेता को इलेक्टोरल कॉलेज के सभी 20 सदस्य आवंटित कर देंगे। लेकिन अगर किसी काउंटी में चुनाव नतीजे को कोर्ट में चुनौती दी गई हो, तो फिर ये काम टल जाएगा।
मिशिगन राज्य में स्टेट बोर्ड ऑफ कॉनवासर्स की बैठक में चुनाव नतीजे को प्रमाणित किया जाता है। यहां निगाहें इस बोर्ड के दो रिपब्लिकन सदस्यों पर हैं। इन सदस्यों- पॉल मिशेल और नॉर्मन शिंकल ने संकेत दिया है कि जब तक चुनाव धांधलियों की जांच नहीं हो जाती, वे नतीजों को प्रमाणित करने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट देंगे। उन्होंने कहा है कि उन्हें धांधली के बारे में सैकड़ों पत्र मिले हैं। ऐसे में वे तथ्यों की जांच के पहले मतदान करने का मन नहीं बना पा रहे हैं।
विस्कोंसिन राज्य में चुनाव नतीजे को प्रमाणित करने की तारीख दिसंबर के पहले हफ्ते में है। यहां निर्वाचन आयोग के एक रिपब्लिकन सदस्य खुद चुनाव धांधली की अपुष्ट खबरें फैलाने में जुटे रहे हैं। इसलिए उनके रुख पर सबकी निगाहें होंगी। जॉर्जिया राज्य ने पिछले शुक्रवार को चुनाव नतीजों को प्रमाणित कर दिया। हालांकि वहां ट्रंप की टीम ने फिर से मतगणना की मांग की है, लेकिन उससे वहां स्थिति बदलने की संभावना नहीं है।
जानकारों का कहना है कि ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी की चुनाव नतीजे को पलटने की ऐसी कोशिशें कामयाब होने की गुंजाइश कम है। लेकिन इसकी वजह से रस्म-अदायगी वाली प्रक्रियाएं भी अहम हो गई हैं। इन प्रक्रियाओं की जितनी चर्चा इस बार हो रही है, उतनी पहले शायद ही कभी हुई हो।