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कोरोना वैक्सीन पर उठे सवाल: ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन बन रहे हैं अमेरिका की नई चिंता

Wed, 21 Jul 2021 05:00 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन वैसे मामलों को कहा जा रहा है, जिनमें कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लगवा चुके लोग संक्रमित हो रहे हैं। अमेरिकी राज्य ऑरेगॉन में संक्रमण के कुल नए मामलों में दस फीसदी मामले ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के सामने आए हैं...
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कोरोना केस - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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कोविड-19 की वैक्सीन लगवा चुके लोगों के कोरोना संक्रमित होने पर उनके अस्पताल में भर्ती होने की नौबत कम आती है। इसके बावजूद उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है और यहां तक कि उनके मरने का खतरा भी बना हुआ है। खास कर ये बात उन लोगों पर लागू होती है, जिनकी उम्र 65 साल से ज्यादा है या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है। ये बात अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी के अमेरिका में कराए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे से सामने आई।

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अमेरिका में बोस्टन स्थित मैसाचुसेट्स डिपार्टमंट ऑफ पब्लिक हेल्थ के एक प्रवक्ता इस बारे में कहा- ‘पूरे कोरोना काल में जिन लोगों की मृत्यु हुई, उनमें बुजुर्ग लोग ज्यादा हैं। यही बात ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के मामलों पर भी लागू हो रही है।’ ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन वैसे मामलों को कहा जा रहा है, जिनमें कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लगवा चुके लोग संक्रमित हो रहे हैं। अमेरिकी राज्य ऑरेगॉन में संक्रमण के कुल नए मामलों में दस फीसदी मामले ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के सामने आए हैं। वहां ज्यादातर ऐसे लोग इस प्रक्रार के संक्रमण के शिकार हुए, जो नर्सिंग होम या ऐसी जगहों पर काम करते हैं, जहां भीड़-भाड़ ज्यादा होती है। जो लोग ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के कारण मरे, उनमें ज्यादातर बुजुर्ग हैं।

अमेरिका के मिनिसोटा राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के कारण जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, उनकी औसत उम्र 74 साल है। विभाग ने ध्यान दिलाया है कि जब से कोविड-19 महामारी आई है, इसी उम्र के लोग सबसे ज्यादा शिकार हुए हैं। ये ट्रेंड अमेरिका के बाहर दूसरे देशों में भी देखा गया है।

इस्राइल में असुता अशडॉड यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ. टेल ब्रोश ने एनबीसी से कहा- हमने देखा है कि ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के लक्षण उन लोगों में ज्यादा गंभीर होकर उभरते हैं, जो पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हैं। इन बीमारियों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी रोग शामिल हैं। उन्होंने कहा- ‘अगर आपने टीका लगवा लिया है, लेकिन आपको ऐसी बीमारियां हैं, तो फिर वैक्सीन से आपको वैसी सुरक्षा नहीं मिलती, जैसी दूसरे लोगों को मिलती है।’
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लेकिन दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के बढ़ते मामलों का यह मतलब नहीं है कि वैक्सीन कारगर नहीं है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक बीते एक मई के बाद से उसने ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के सभी मामलों की निगरानी की। लेकिन अब वह सिर्फ उन मामलों की निगरानी कर रहा है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है। अमेरिका में अब तक ऐसे दस हजार से कुछ ज्यादा मामले सामने आए हैं।

एनबीसी के सर्वे से सामने आया कि अमेरिका में अब तक ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के 65 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इस ओर ध्यान दिलाने पर सीडीसी के कोविड-19 संबंधी विभाग के प्रमुख डॉ. जेय बटरल ने एनबीसी से कहा- ‘अमेरिका में 16 लाख लोगों का पूरा टीकाकरण हुआ है। उससे तुलना करें तो 65 हजार की संख्या भी छोटी ही मानी जाएगी। और फिर अगर संक्रमण होता भी है, तब भी अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम ही रहता है।’
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