महाशक्ति देश रूस की अब यूक्रेन जंग में एक बार फिर मुश्किल होने वाली है। अगले कुछ दिनों में कुदरती 'हथियार' रूसी फौज के लिए आफत बरसाने वाला है।
पिछले नौ माह से दोनों लगातार एक दूसरे पर बमबारी कर रहे हैं। दोनों के बीच कई बार बातचीत से सुलह की कोशिशें की गईं, लेकिन वे विफल रहीं। रूस को भी कल्पना नहीं रही होगी कि चंद हफ्तों में सिमट जाने वाली जंग नौ माह तक चलती रहेगी। दोनों पक्षों को जंग लंबी खींचने से भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। यूक्रेन में खंडहर इमारत रूसी कहर बयां कर रही हैं।
कुछ दिनों पहले यूक्रेन की सेना ने रूसी फौजों को कुछ इलाकों से खदेड़ दिया था, लेकिन अब एक बार फिर राष्ट्रपति पुतिन की सेना भारी पड़ रही है। हालांकि, अब मौसम रूसी फौज के लिए बड़ी आफत का सबब बनने जा रहा है।
अगले एक पखवाड़े में यूक्रेन में ठंड व बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो जाएगा। दिसंबर से मार्च के बीच यूक्रेन में औसत तापमान माइनस 4.8 डिग्री सेल्सियस से लेकर 2 डिग्री सेल्सियस तक रहता हे। देश में दिसंबर में औसत 14 दिन, जनवरी में 17 दिन और फरवरी में 15 दिन बर्फ पड़ती है। इस दौरान हर महीने औसत डेढ़ मीटर बर्फ यहां पड़ती है। यही हालात रूसी सेना के लिए 'कुदरती बम' की तरह काम करेंगे।
यूक्रेन के लोग चाहते हैं कि इस बार देश में कड़ाके की ठंड पड़े, ताकि रूसी फौज व उसके सैन्य वाहन कीचड़ में फंस जाएं। उन्हें अपने जवानों के लिए रसद पहुंचाना आसान नहीं हो।
रूस कर सकता है बिजली गुल, ऐसा हुआ तो यूक्रेन की होगी मुश्किल
महाशक्ति देश भी यूक्रेन के लिए संकट पैदा कर सकता है। पिछले दिनों उसने यूक्रेन के बिजलीघरों पर बड़े हमले किए थे। ऐसे ही हमले तेज कर के यूक्रेन की मुश्किल तेज हो सकती है। यदि रूस ने मिसाइल हमलों से यूक्रेन में बिजली व्यवस्था छिन्न भिन्न कर दी तो यूक्रेन की सेना व नागरिक ठंड से मारे जाएंगे। ये हालात यूक्रेन की फजीहत कर देंगे।