किसी ग्रह का नाम रखने का मौका शायद ही दुनिया में कभी लोगों को मिला हो। आमतौर पर ग्रह का नाम रखने का काम इसकी खोज में लगे लोगों को ही मिल पाता है। वहीं कई बार ऐसा भी होता है कि किसी ग्रह और खगोलीय घटनाओं को आधिकारिक नाम ही नहीं दिया जाता और वह सालों तक अपने वैज्ञानिक नाम से ही जाने जाते हैं।
ओआर10 नाम के एक ग्रह का नाम रखने का मौका खोजकर्ताओं ने लोगों को दिया है। जिसके लिए वोटिंग सिस्टम का सहारा लिया जा रहा है। इस छोटे से ग्रह की खोज करीब 12 साल पहले जुलाई 2017 में हुई थी।
ओआर10 इसका वैज्ञानिक नाम है। इसे खोजकर्ता मेग श्वांब, माइक ब्राउन और डेविड रैबिनोवित्ज की टीम ने अंतरिक्ष के एक किनारे स्थित कुइपर बेल्ट में ढूंढा था। यूं तो इस बेल्ट में कई पदार्थ मौजूद हैं, लेकिन ओआर10 मलबे में सबसे बड़ा ग्रह था।
अंतरराष्ट्रीय खगोल संघ (आईएयू) में नाम मंजूर कराने से पहले कुछ मापदंड पूरे करने जरूरी होते हैं। तीन वैज्ञानिकों के नाम पर ग्रह का नाम रखना संभव नहीं था।
इसलिए तीनों खोजकर्ताओं ने संभावित नाम- गोंगगोंग, होले और विली तय किए हैं। इन नामों पर 10 मई तक वोटिंग का समय दिया गया है। चुने गए ये तीन नाम पौराणिक भगवानों पर आधारित हैं। जिस नाम को सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे, उसे ही ग्रह के नाम के लिए आईएयू के सामने पेश किया जाएगा।