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वोटिंग के अधिकार पर अब अमेरिका में छिड़ गई है सियासी जंग, राष्ट्रीय कानून बनाने की मांग तेज

Wed, 02 Jun 2021 04:02 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े ने अब दो टूक कहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन को तमाम हिचक छोड़ कर सीनेट के फिलिबस्टर नियम को खत्म करते हुए उस कानून को पारित कराना चाहिए, जिसे डेमोक्रेटिक बहुमत वाला हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव पहले ही पास कर चुका है...
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अमेरिकी सीनेट - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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अमेरिका के टेक्सास राज्य में मतदान संबंधी नियम बदलने को लेकर गहराते विवाद में अब सारा देश उलझता दिख रहा है। अब डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इस मामले में राष्ट्रीय कानून को पारित कराने की मांग तेज हो गई है। खासकर डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े ने अब दो टूक कहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन को तमाम हिचक छोड़ कर सीनेट के फिलिबस्टर नियम को खत्म करते हुए उस कानून को पारित कराना चाहिए, जिसे डेमोक्रेटिक बहुमत वाला हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव पहले ही पास कर चुका है।

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इस हफ्ते टेक्सास में राज्य के सीनेट ने वोटिंग अधिकार को संकुचित करने और मतदान करना मुश्किल बनाने के मकसद से एक बिल पारित किया। जब वो बिल वहां की विधायिका के निचले सदन में लाया गया, तो डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य वॉकआउट कर गए। उससे सदन में कोरम (उपस्थित सदस्यों की अनिवार्य न्यूनतम संस्था) की समस्या खड़ी हो गई। इससे बिल पारित नहीं हो सका। डेमोक्रेटिक पार्टी के इस आचरण से नाराज हुए राज्य के रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट ने विधायिका के लिए बजट रोक देने की धमकी दी है। ऐसा होने पर विधायिका सदस्यों को तनख्वाह नहीं मिल पाएगी। एबॉट ने कहा है कि जिन सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, उन्हें वेतन पाने का कोई हक नहीं है।

पिछले नवंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद टेक्सास के पहले रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाले कई राज्य मतदान के नियम बदलने का कानून बना चुके हैं। गौरतलब है कि रिपब्लिकन पार्टी का आरोप है कि पिछले चुनाव के दौरान धांधली हुई, जिस कारण पार्टी के उम्मीदवार तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव हार गए। इसलिए अपने बहुमत वाले राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी समय से पूर्व मतदान, मतदान के लिए पहचान पत्र और मतदान केंद्र कायम करने आदि के बारे में सख्त नियम लागू करने में जुटी है। इन नियमों के लागू होने से ब्लैक और दूसरे कमजोर तबकों के लोगों के लिए मतदान करना कठिन हो जाएगा, जिन्हें आमतौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थक माना जाता है।
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रिपब्लिकन बहुमत वाले राज्यों में पारित मतदान अधिकार संबंधी कानूनों को बेअसर करने के लिए हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में मतदान संबंधी राष्ट्रीय नियम तय करने के मकसद से एक बिल पारित किया गया था। लेकिन उसे अभी तक सीनेट में पेश नहीं किया गया है, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी के पास सिर्फ साधारण बहुमत है। फिलिबस्टर नियम लागू होने पर 100 सदस्यीय सदन में किसी बिल के पास होने के लिए 60 सदस्यों का समर्थन जरूरी हो जाता है। रिपब्लिकन पार्टी कह चुकी है कि अगर ये बिल सीनेट में लाया गया, तो वह फिलिबस्टर लागू करेगी।

टेक्सास के गवर्नर ने अब एलान किया है कि राज्य में वोटिंग बिल को अब विधायिका के संयुक्त अधिवेशन में पेश किया जाएगा। लेकिन ये अधिवेशन कब होगा, यह अभी उन्होंने नहीं बताया है। लेकिन इससे यह साफ हुआ है कि टेक्सास में रिपब्लिकन पार्टी इस बिल को पास कराने के इरादे पर अड़ी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषक पॉल जे वेबर ने लिखा है कि टेक्सास में डेमोक्रेटिक सदस्यों ने जो तेवर दिखाया, उससे पार्टी और वोटिंग अधिकार के समर्थकों का मनोबल बढ़ा है। लेकिन वहां बिल को पारित होने से इस तरह रोकना महज एक फौरी व्यवधान है। फिर गवर्नर ने डेमोक्रेट सदस्यों को दंडित करने की कार्यवाही शुरू कर दी है। इससे विवाद बढ़ना तय है। इसलिए अब असल सवाल यह रह गया है कि क्या राष्ट्रपति बाइडन फिलिबस्टर नियम खत्म करने के लिए तैयार होंगे? ऐसा होने का मतलब रिपब्लिकन पार्टी के साथ किसी मुद्दे पर सहमति बनने की संभावना का खत्म होना होगा। अब तक इस संभावना से बाइडन हिचकते रहे हैँ।

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