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अब खुद को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की नीति पर चलेगा चीन

Thu, 15 Oct 2020 04:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

  • शेनजेन से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का संदेश, अपने बल पर करेंगे नए अविष्कार
  • कोरोना काल में दुनिया की खराब हुई अर्थव्यवस्था से बहुत कुछ सीख रहा है चीन
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Xi Jinping coughs and coughs at Shenzhen event as Carrie Lam - फोटो : cctv
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विस्तार
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एलान किया है कि चीन को अब बदलती हुई परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ना पड़ेगा। दूसरे देशों पर से निर्भरता खत्म करनी होगी। उन्होंने ये भी कहा है कि अब चीन को अपने नए आविष्कारों के लिए आजादी से सोचना होगा और कोशिश करनी होगी।

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चीन के दक्षिणी शहर शेंनजेन में विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित होने की 40वीं सालगिरह के मौके पर दिए गए अपने भाषण में शी जिनपिंग ने कहा कि शेनजेन एसईजेड का चीन के मौजूदा विकास में खास महत्व है। यहीं से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वोच्च नेता देंग श्याओफिंग ने 1979 में चीनी अर्थव्यवस्था को खोलने की शुरुआत की थी। 1980 में यहां पहला एसईजेड बना।

इस नीति से चीन की सूरत बदल गई। लेकिन इस क्रम में देंग की 1992 में हुई शेनजेन समेत कई दक्षिणी शहरों के दौरे को खास तौर पर याद किया जाता है। उस दौरान देंग ने अमीर होने के महत्व पर जोर दिया था। साथ ही सलाह दी थी कि चीन अपनी पहचान को परदे में रखते हुए सही समय आने का इंतजार करे। ये बातें तीन दशक से चीन की मार्ग-दर्शक रही हैं। अब शी देश को उससे अलग रास्ते पर ले जा रहे हैं। इसीलिए उनके शेनजेन दौरे को खास अहमियत दी गई।
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शी ने विकास के “जन-केंद्रित दर्शन” पर ठोस अमल और देश में मौजूद तमाम एसईजेड में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने साफ किया कि अब रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य रक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आवास उपलब्ध कराने, बुजुर्गों की देखभाल, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने को केंद्रीय महत्त्व दिया जाएगा।

दरअसल, इस बारे में चीन की संसद- नेशनल पीपुल्स कांग्रेस- पिछले मई में एक प्रस्ताव पारित कर चुकी है। उसके आधार पर नई आर्थिक और सामाजिक नीतियों का एक दस्तावेज तैयार किया गया है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी 26 अक्टूबर को उस पर विचार करेगी। ये लगभग तय है कि सेंट्रल कमेटी की उस बैठक में इस मसौदे को मंजूरी दे दी जाएगी। नई प्रस्तावित नीति पांच साल यानी 2021 से 2025 तक के लिए है।

प्रस्तावित नीति में खास बात यह है कि उसमें जीडीपी विकास दर का कोई लक्ष्य नहीं किया गया है। चीनी नेताओं ने ये साफ किया है कि अब चीन जीडीपी केंद्रित विकास नीति को छोड़ रहा है। इसका एक संदर्भ कोरोना महामारी है, जिसकी वजह से भूमंडलीकरण की नीति खतरे में पड़ गई है। गुजरे दशकों में हुए चीन के तेज विकास में ग्लोबलाइजेशन की खास भूमिका थी।

चीन ने विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोले, खुद को मैनुफैक्चरिंग का सबसे अहम ठिकाना बनाया और निर्यात से विदेशी मुद्रा कमाकर वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। लेकिन अब अमेरिका और कई यूरोपीय देश उसके उभार को नियंत्रित करने की प्रभावी नीति पर चल रहे हैं। कोरोना महामारी ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। यह आम समझ बन गई है कि मैनुफैक्चरिंग और अर्थव्यवस्था के वित्तीयकरण पर आधारित नीतियां अब अपने डेडएंड पर पहुंच गई हैं। तो इस मजबूरी में चीन ने “आत्म-निर्भरता” की राह पर चलने का फैसला किया है। 

नई नीति में आंतरिक बाजार को मजबूत करना, ग्रामीण समाज का पुनर्जीवन, पर्यावरण की रक्षा करने वाले विकास कार्यों पर जोर देना, देशी ज्ञान और चिकित्सा पद्धति को अधिक महत्व देना, और स्वास्थ्य देखभाल को जन-आंदोलन बनाना शामिल है। शेनजेन से शी ने यही पैगाम दिया है कि चीन अब बेहिचक नए रास्ते पर जाएगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में आज चीन की इतनी खास भूमिका बन चुकी है कि नए रास्ते पर उसकी सफलता-विफलताओं पर सारी दुनिया करीबी निगाह रखेगी।

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