आज तक आप सब्जी, फल, दाल आदि किलोग्राम के हिसाब से खरीदते आ रहे हैं, लेकिन अब यह किलोग्रम रिटायर किया जा चुका है। किलो को रिटायर करने को लेकर फ्रांस में पिछले दिनों दुनिया के 60 वैज्ञानिक जुटे। सभी वैज्ञानिकों के बीच वोटिंग हुई और किलोग्राम के सबसे बड़े पैमाने और मानक को रिटायर किया गया। यानि अब जब आप सामान खरीदने बाजार जाएंगे और एक किलो सामान खरीदेंगे तो हम आपको बता दें कि किलोग्राम का वजन अब बदल चुका है।
वैसे मानक में हुए इस बदलाव का प्रभाव आम जनता पर नहीं पड़ेगा लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। आम लोगों के जीवन में इसका प्रभाव इसलिए नहीं पड़ेगा क्योंकि थोड़े से बदलाव के बाद एक किलोग्राम चावल में यदि एक चावल का दाना कम हो जाए तो उससे आम जनता पर तो कोई प्रभाव पड़ता दिखाई नहीं देता है लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में ये छोटा सा बदलाव भी बहुत प्रभाव डालता है।
फ्रांस के वर्साइल्स में वजन और मापने की प्रक्रिया पर हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में फैसला हुआ कि किलोग्राम को पारिभाषित करने का तरीका बदला जाए। इस दौरान वैज्ञानिकों ने ये फैसला लिया कि अब तौल की इकाई को परिभाषित करने के लिए विद्युत धाराओं से पैदा की गई ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। नए पैमाने के तहत अब बिजली से पैदा हुई ऊर्जा से तौल के मानक की परिभाषा तय होगी।
प्लैटिनम से बना ली ग्रैंड है किलोग्राम का मानक
फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक तिजोरी में किलोग्राम को मापने वाली 129 साल पुराना एक माप रखा है। जिसे ली ग्रैंड कहा जाता है। प्लैटिनम से बना ली ग्रैंड ही इंटरनेशनल प्रोटोकॉल किलोग्राम माना जाता है। जो कि एक किलो के सटीक बाट की तरह है।
अब इसका हो रहा है क्षरण जिसकी वजह से हुआ मानक में बदलाव
अब इस बाट का क्षरण हो रहा है। कुछ साल पहले ही इसमें 30 माइक्रोग्राम की कमी आई है। यह कमी चावल के एक दाने जितनी है। वैज्ञानिकों ने यह भी फैसला लिया है कि माप के लिए प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही माना ये भी जा रहा है कि मई 2019 के बाद मीटर और सेकेंड समेत अन्य इकाइयों के मानकों में भी बदलाव किया जाएगा।
कुछ ऐसा रहा है किलो का सफर
- किलोग्राम को साल 1889 से ही ली ग्रैंड के नाम से परिभाषित किया जा रहा है। इसे इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट एंड मेजर के हेडक्वार्टर में रखा गया है।
- ली ग्रैंड से वजन पहले के मुकाबले नहीं हो पा रहा था। इसके तीन ग्लास बेल जार में धूल मिट्टी के कण और वातावरण के कारण फर्क पड़ा है। इसमें सफाई की जरूरत है, जिससे इसके मास पर असर पड़ सकता है।
- वैज्ञानिकों ने एम्पियर (इलेक्ट्रिक करंट) और कैल्विन (थरमोडायनामिक टेमपिरेचर) की परिभाषा को अपटेड करने के लिए भी वोट किया है।