उत्तर कोरिया ने आर्थिक सहायता के बदले परमाणु हथियार खत्म करने की दक्षिण कोरिया की पेशकश को ठुकरा दिया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-यिओल ने यह प्रस्ताव बीते 15 अगस्त को रखा था। उन्होंने कहा था कि अगर उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण का वादा करे, तो दक्षिण कोरिया उसे ‘बहुत बड़ी रकम’ देगा।
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने शुक्रवार को सरकारी मीडिया पर अपनी टिप्पणी के जरिए कहा कि यून की पेशकश ‘मूर्खता की मिसाल’ है। उन्होंने कहा- ‘दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने ये पेशकश करके बचपने का परिचय दिया है। उनकी छवि के लिए यह बेहतर होगा कि वे अपनी जुबान बंद रखेँ।’ किम ने यहां तक कहा कि उत्तर कोरिया के लोग यून सुक यिओल को इंसान नहीं मानते।
उत्तर कोरिया के इस रुख पर दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री क्वोन यांग से ने कहा- ‘किम यो जोंग की हमारे राष्ट्रपति की बेहद अशिष्ट और असम्मानजनक आलोचना पर मैं गहरे अफसोस का इजहार करता हूं।’ विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकरण के अप्रिय रूप ले लेने की वजह दोनों देशों के बीच जारी संवादहीनता है। अब दोनों देशों में तनाव और बढ़ने का अंदेशा है। अगली गर्मियों में दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच साझा सैनिक अभ्यास होगा। उधर संभावना है कि उत्तर कोरिया नए परमाणु परीक्षण कर सकता है। साथ ही वह मिसाइलों को दागना भी जारी रखेगा। इनके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में तनाव में और बढ़ोतरी होगी।
वेबसाइट एशिया टाइम्स ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि यून और किम के बीच जो बदजुबानी हुई है, उसका असर अगले पांच साल तक जारी रह सकता है। उत्तर कोरिया के सत्ता तंत्र पर किम परिवार की पकड़ जारी है और निकट भविष्य में वहां किसी बदलाव की संभावना नहीं है। यून हाल ही में पांच साल के कार्यकाल के लिए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति बने हैं।
दक्षिण कोरिया सरकार के एक सूत्र ने अपना नाम न छापने की शर्त पर एशिया टाइम्स से कहा- ‘किम यो जोंग ने जो प्रतिक्रिया दी, उसका अनुमान पहले से लगाया जा सकता था। किम पहले भी कह चुकी हैं कि उत्तर कोरिया पैसे के बदले अपने परमाणु हथियार नष्ट नहीं करेगा। इसलिए गलतफहमी यून सरकार ने दिखाई। उत्तर कोरिया की नजर में जो मूलभूत प्रश्न हैं, जब तक वे हल नहीं होते, वह अपने परमाणु हथियार खत्म नहीं करेगा।’
विश्लेषकों के मुताबिक उत्तर कोरिया की नजर में उसके अस्तित्व के लिए मुख्य खतरा अमेरिका की नीतियां हैं। ये नीतियां उसकी नजर में उत्तर कोरिया के लोगों के विकास के रास्ते में रुकावट हैं। इन नीतियों को बदलने की दिशा में दक्षिण कोरिया कोई खास योगदान नहीं कर सकता। इसलिए उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को सुनिश्चित करने में उसकी ज्यादा भूमिका नहीं है।
इन विश्लेषकों के मुताबिक कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की शुरुआत तभी होगी, जब अमेरिका कुछ ठोस कदम उठाए। इनमें शामिल हैं, दक्षिण कोरिया के साथ साझा सैनिक अभ्यास पर रोक, दक्षिण कोरिया में अमेरिकी हथियारों की तैनाती पर रोक, और उत्तर कोरिया और अमेरिका के संबंधों में सुधार। फिलहाल, इस दिशा में किसी प्रगति के संकेत नहीं हैं।