फरवरी में किम और ट्रंप के बीच हुई शिखर वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद से ही अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच गतिरोध जारी है। इसके बावजूद ट्रंप ने कोई हल निकालने का विश्वास जाहिर किया था।
वहीं, इससे पहले केसीएनए ने कहा था, ‘इस अभ्यास का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र और पूर्वी मोर्चे पर लंबी दूरी वाले रॉकेट लॉन्चरों और सामरिक हथियारों की क्षमता एवं हमला करने की सटीकता का अनुमान लगाना था।’
उसने कहा कि यह अभ्यास पूर्वी समुद्र में किया गया, जिसे जापान सागर भी कहा जाता है। प्योंगयोंग की इस कार्रवाई से प्रतीत होता है कि वह लंबित पड़ी परमाणु वार्ता को लेकर वॉशिंगटन पर दबाव बनाना चाहता है।