ट्रेन में किम की खास बुलेटप्रूफ कारें भी होती हैं, जो ट्रेन के रुकने पर किम को बाहर स्थानीय यात्रा के लिए इस्तेमाल होती हैं। साथ ही सेहत के लिए यहां जिम और खेलने की सुविधा भी है। सैनिकों और शेफ के अलावा तीनों ही ट्रेनों में डॉक्टरों का एक ग्रुप होता है, जिसमें से कुछ डॉक्टर सिर्फ किम की सेहत का ध्यान रखते हैं।
भारी-भरकम डिब्बे
किम जोंग की इस बख्तरबंद ट्रेन में 90 खास डिब्बे हैं, जिनसे तीन ट्रेनें चलती हैं। ट्रेन के सारे डिब्बों के बुलेटप्रूफ होने की वजह से इसका वजन काफी ज्यादा है और इसी वजह से ये 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा तेजी से नहीं चल सकती। किम की इन तीन खास ट्रेनों के लिए अलग से 20 स्टेशन बने हैं, जहां खुफिया कमरे भी हैं। इन जगहों पर आम लोगों या इजाजत के बिना किसी सरकारी आदमी का आना-जाना भी मना है।
ट्रेन की सुरक्षा
ट्रेन में सुरक्षा के सारे बंदोबस्त हैं। माना जाता है कि इसके सारे डिब्बे बख्तरबंद होते हैं, जहां लड़ाई या खुद को बचाने के सारे आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। साथ ही अलग-अलग टेलीफोन लाइन भी हैं। किम की प्राइवेट ट्रेन के गुजरने से पहले एक और प्राइवेट ट्रेन निकलती है, जो रेलवे लाइन पर सुरक्षा के इंतजाम का जायजा लेती है। इसके बाद किम की ट्रेन होती है, जो पहली ट्रेन से 20 मिनट बाद आती है। तीसरी ट्रेन में अतिरिक्त सुक्षा स्टाफ और जरूरत की दूसरी चीजें होती हैं।
कहा जाता है कि किम जोंग के पिता किम जोंग इल भी अपनी विदेश यात्राओं में इसी ट्रेन का इस्तेमाल करते थे। यहां तक कि किम के दादा किम 2 संग भी इसी खास ट्रेन का उपयोग करते थे। 1950 में कोरियन युद्ध के दौरान वर्तमान तानाशाह के दादा ने इसी ट्रेन को अपने वॉर रूम की तरह इस्तेमाल किया था।