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उत्तर कोरिया: किम जोंग ने देश को घोषित किया परमाणु संपन्न, फिर पश्चिम क्यों कर रहा स्वीकारने में देरी, जानें

Mon, 31 Oct 2022 08:24 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, प्योंग्यांग

सार

उत्तर कोरिया अपने को परमाणु हथियार संपन्न देश घोषित करने के लिए एक कानून भी पारित कर चुका है। हाल में उसने 20 से ज्यादा ऐसी मिसाइलों के परीक्षण किए हैं, जिनसे परमाणु हथियार दागे जा सकते हैं। 
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उत्तर कोरिया में जारी हैं परीक्षण। - फोटो : ANI
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विस्तार
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उत्तर कोरिया ने यह साफ कर दिया है कि अपने परमाणु हथियारों को वह नष्ट नहीं करेगा। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने पिछले महीने दो टूक कहा था कि उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार बनाए हैं और अब वह कभी इन्हें खत्म नहीं करेगा। उन्होंने कहा- इस मामले अब कदम पीछे नहीं खींचा जा सकता। ये हथियार हमारी गरिमा और हमारे राज्य की सर्वोच्च शक्ति का प्रमाण हैं। 
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उत्तर कोरिया अपने को परमाणु हथियार संपन्न देश घोषित करने के लिए एक कानून भी पारित कर चुका है। हाल में उसने 20 से ज्यादा ऐसी मिसाइलों के परीक्षण किए हैं, जिनसे परमाणु हथियार दागे जा सकते हैं। उसने यह एलान भी किया है कि वह टैक्टिकल परमाणु हथियारों को संभावित युद्ध क्षेत्र में तैनात कर रहा है। इसके अलावा वहां के मीडिया ने खबर दी है कि उत्तर कोरिया जल्द ही अपना सातवां परमाणु परीक्षण करेगा। 

इन घोषणाओं के बाद अब विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पश्चिमी देशों को उत्तर कोरिया को उसी तरह एक परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए, जैसा उन्होंने इजराइल के मामले में कर रखा है। अमेरिकी थिंक टैंक कारनेगी एन्डोवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर फेलॉ अंकित पांडा ने कहा है- ‘हमें उत्तर कोरिया को उसी रूप में स्वीकार करना होगा, जैसा वह है।’
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परमाणु वैज्ञानिकों ने हाल में यह लिखा है कि उत्तर कोरिया के पास संभवतः इतनी विखंडनीय सामग्री है, जिससे वह 45 से 55 परमाणु हथियार बना ले। हाल के उसके मिसाइल परीक्षणों से यह संकेत भी मिला है कि उत्तर कोरिया के पास परमाणु हथियार दागने की कई विधियां मौजूद हैं।

सिओल स्थित कूकमिन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और उत्तर कोरियाई मामलों के विशेषज्ञ आंद्रेई लैंकोव ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘हमें यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियार संपन्न देश है। साथ ही उसके पास इन हथियारों को दागने के सभी जरूरी सिस्टम हैं।’ लेकिन कई दूसरे विशेषज्ञों की राय है कि इस हकीकत को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर लेना खतरनाक होगा।  उससे एशिया में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो जा सकती है। उस स्थिति में दक्षिण कोरिया, जापान और ताइवान भी उत्तर कोरिया का मुकाबला करने के लिए परमाणु हथियार बनाने की दौड़ में उतर सकते हैं।

इसी असमंजस के बीच ‘इजराइल मॉडल’ की चर्चा शुरू हुई है। इस समाधान का सुझाव अमेरिका के मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफेयरेशन स्टडीज में एडजंक्ट प्रोफेसर जेफरी लुइस ने दिया है। उन्होंने कहा है- ‘मेरी राय में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए अपने प्रशासन के सामने यह स्पष्ट कर देना एक निर्णायक कदम होगा कि हमारे लिए उत्तर कोरिया को निरस्त्र करना संभव नहीं है। उसे औपचारिक रूप से परमाणु हथियार संपन्न देश घोषित करने की जरूरत भी नहीं है। सिर्फ हकीकत से तालमेल बैठाने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा है कि इजराइल और भारत परमाणु हथियार संपन्न देश हैं। अमेरिका ने इसे सार्वजनिक मान्यता नहीं दे रखी है। इसके बावजूद साथ दोनों देशों के  साथ उसने मित्रता बनाए रखी है। वही फॉर्मूला उत्तर कोरिया के बारे में भी अपनाया जा सकता है।
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