नोबेल पुरस्कारों की घोषणा सोमवार से शुरू हो गई है। चिकित्सा के क्षेत्र में इस साल तीन वैज्ञानिकों को दुनिया का सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करने के लिए चुना गया है। इम वैज्ञानिकों के नाम विलियम जी केलिन, सर पीटर जे रैटक्लिफ और ग्रेग एल सेमेन्जा हैं। इन्होंने इस चीज की खोज की थी कि कैसे सेल्स ऑक्सीजन को जलाते हैं ताकि शरीर को ऊर्जा मिल सके और नई कोशिकाओं को बनने में मदद मिले।
विलियम जी केलिन जूनियर का जन्म 1957 में न्यूयॉर्क में हुआ था। ड्यूक विश्वविद्यालय से एमडी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय और बॉस्टन के दाना—फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट से विशेष प्रशिक्षण हासिल किया।
नोबेल पुरस्कार के हर विजेता को करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि दी जाती है। इसके साथ 23 कैरेट सोने से बना 200 ग्राम का पदक और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाता है। पदक के एक ओर नोबेल पुरस्कार के जनक अल्फ्रेड नोबेल की छवि, उनके जन्म तथा मृत्यु की तारीख लिखी होती है। पदक की दूसरी तरफ यूनानी देवी आइसिस का चित्र, रॉयल एकेडमी ऑफ साइंस स्टॉकहोम तथा पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति की जानकारी होती है।
मालूम हो कि 1901 से 2018 के बीच चिकित्सा के क्षेत्र में 109 नोबेल पुरस्कार दिए जा चुके हैं। कुल 216 विजेताओं में 12 महिलाओं के नाम शामिल हैं, जिनमें से दो महिलाओं को साल 2009 में एक साथ पुरस्कृत किया गया। इंसुलिन की खोज करनेवाले फ्रेडरिक जी. बैंटिंग ने साल 1923 में महज 32 साल की उम्र में यह पुरस्कार प्राप्त किया था। चिकित्सा के क्षेत्र में वह अबतक के सबसे युवा नोबेल पुरस्कार विजेता हैं। वहीं, पेटोन राउस (87) सबसे उम्रदराज नोबेल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें ट्यूमर इंड्यूसिंग वायरस की खोज के लिए 1966 में यह पुरस्कार दिया गया था।