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भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार, पीएम मोदी ने दी बधाई

Mon, 14 Oct 2019 05:07 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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अर्थशास्त्र क्षेत्र में नोबेल की घोषणा - फोटो : The Nobel Prize
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अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी, उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो और माइकल क्रेमर को 'वैश्विक गरीबी खत्म करने के प्रयोग' के उनके शोध के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने का एलान किया गया है। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिजीत बनर्जी को नोबेल पुरस्कार मिलने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, अभिजीत बनर्जी को बधाई, उन्होंने गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को भी बधाई दी।





 


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नोबेल पुरस्कार मिलने पर अभिजीत बनर्जी को शुभकामनाएं दीं। ममता ने ट्वीट किया कि दक्षिण प्वाइंट स्कूल और प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता के पूर्व छात्र अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीतने के लिए हार्दिक बधाई। एक और बंगाली ने राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। हम बहुत खुश हैं।
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अभीजीत बनर्जी की मां निर्मला बनर्जी ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। यह पूरे परिवार के लिए एक बड़ा गौरव का पल है।
 




भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अभिजीत बनर्जी फिलहाल मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। वह और उनकी पत्नी डफ्लो अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी ऐक्शन लैब के सह-संस्थापक भी हैं।

अभिजीत बनर्जी ने 1981 में कोलकाता यूनिवर्सिटी से बीएससी किया था, जबकि 1983 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) दिल्ली से एमए किया था। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1988 में पीएचडी की।
 

 

बता दें कि इससे पहले शांति का नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई थी। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार उनके देश के चिर शत्रु इरिट्रिया के साथ संघर्ष को सुलझाने के लिए दिया गया।

नोबेल पुरस्कार जूरी ने बताया अबी को शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों के लिए और विशेष रूप से पड़ोसी इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को सुलझाने के निर्णायक पहल के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

सत्ता संभालने के बाद से, अहमद ने राजनीति में महिलाओं की भूमिका में बढ़ोतरी करने की पहल की। उन्होंने सरकार में अपने देश के 20 मंत्री पदों में से आधे पदों पर महिलाओं को नियुक्त किया, जिसमें देश की पहली महिला रक्षा मंत्री भी शामिल थीं।

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