संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारिनो ग्रोसी भी इस हफ्ते के अंत में ईरान का दौरा करेंगे। IAEA ने ही साल 2015 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए परमाणु समझौते में अहम भूमिका निभाई थी।
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर अगली बैठक रोम में हो सकती है। इटली के अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र संघ के परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख भी इस हफ्ते के अंत में ईरान का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी बढ़ाने को लेकर चर्चा हो सकती है। अमेरिका और ईरान की बातचीत बेहद अहम है और अगर सबकुछ सही रहा तो इससे अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बेहतरी हो सकती है।
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ट्रंप बना रहे दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर परमाणु समझौते का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि अगर परमाणु समझौते पर सहमति नहीं बनी तो वे ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर हवाई हमले का आदेश दे देंगे। वहीं ईरान के अधिकारी लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि वे यूरेनियम के भंडार को समृद्ध करके परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। दोनों देशों की बातचीत की मध्यस्थता ओमान कर रहा है। दोनों देशों के बीच पहली बैठक भी ओमान की राजधानी मस्कट में हुई थी। हालांकि अभी तक इसे लेकर ईरान या अमेरिका की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। इटली की सरकार के एक अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच रोम में अगली बैठक हो सकती है। इससे पहले इटली के विदेश मंत्री ने भी जापान दौरे पर बताया था कि उन्होंने अमेरिका और ईरान की बैठक की मंजूरी दे दी है।
संयुक्त राष्ट्र के परमाणु कार्यक्रम निगरानी संस्था के प्रमुख भी करेंगे ईरान का दौरा
इस सबके बीच संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारिनो ग्रोसी भी इस हफ्ते के अंत में ईरान का दौरा करेंगे। IAEA ने ही साल 2015 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए परमाणु समझौते में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि साल 2018 में राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका इस डील से पीछे हट गया था।
2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन को कम किया था औरल दावा किया गया कि सिर्फ पावर प्लांट की जरूरत के लिए 3.67 प्रतिशत ही यूरेनियम का संवर्धन किया। इस समझौते के तहत ईरान पर लगे प्रतिबंध हट गए और उसकी दुनियाभर में मौजूद संपत्तियों को मुक्त कर दिया गया। हालांकि समझौते के टूटने के बाद फिर से ईरान पर प्रतिबंध लागू हो गए।