क्या न्यूजीलैंड अमेरिकी खेमे से खुद को दूर कर रहा है? ये सवाल हाल में न्यूजीलैंड सरकार के कुछ फैसलों से खड़ा हुआ है। सोमवार को न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री नानिया माहुटा ने दो टूक कहा कि उनका देश फाइव आईज इंटेलिजेंस शेयरिंग एलायंस (खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करने वाले पांच देशों के गठजोड़) की विदेश नीति को निर्देशित करने के प्रयासों से असहज है। फाइव आईज इंटेलिजेंस शेयरिंग अलायंस दूसरे विश्व युद्ध के बाद बना था। इसमें न्यूजीलैंड के अलावा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। ये देश इसके तहत आपस में खुफिया सूचनाओं को साझा करते हैँ।
अलांयस ने हाल के महीनों में चीन से संबंधित कई मामलों में बयान जारी किए हैं। उनमें चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के मानवाधिकारों के कथित हनन और हांगकांग का मसला भी शामिल है। सोमवार को न्यूजीलैंड-चीन काउंसिल की बैठक को संबोधित करते हुए माहुटा ने कहा- ‘हमने फाइव आईज के सहभागियों के सामने ये कहा है कि इस गठजोड़ की संबंधों का दायरा बढ़ाने की कोशिशों से हम असहज हैं। इसके बदले हम विभिन्न मुद्दों पर अपने हितों को व्यक्त करने के बहुपक्षीय अवसरों की तलाश करेंगे।’
चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापार सहभागी है। दोनों देश के बीच सालाना व्यापार 29.5 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। उधर चीन ने हाल में फाइव आईज गठजोड़ की कड़ी आलोचना की है। शिनजियांग मामले में उसके बयान के बाद चीन ने कहा था कि फाइव आईज में शामिल देश चीन के खिलाफ गिरोहबंदी कर रहे हैं। लेकिन हाल में न्यूजीलैंड ने लगातार इस गठजोड़ से दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। पिछले जनवरी में जब फाइव आईज ने हांगकांग में गिरफ्तारियों के मामले में बयान जारी किया, तो उस पर न्यूजीलैंड ने दस्तखत नहीं किया। उसके बाद मार्च में चीन और न्यूजीलैंड ने अपने बीच मौजूद मुक्त व्यापार समझौते का दर्जा बढ़ाने का फैसला किया।
फाइव आईज गठजोड़ से न्यूजीलैंड की बन रही दूरी का साफ संकेत पिछले महीने भी मिला था, जब न्यूजीलैंड ने इस गठजोड़ और अन्य देशों के उस बयान पर दस्तखत करने से मना कर दिया, जिसमें कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति संबंधी विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट की आलोचना की गई थी। इन कदमों को लेकर प्रधानमंत्री जेसिंडा ऑर्डन की सरकार की देश के भीतर उनके कंजरवेटिव विरोधियों ने आलोचना की है। उन्होंने जेसिंडा सरकार पर फाइव आईज की एकजुटता तोड़ने का आरोप लगाया है।
लेकिन माहुटा ने कहा कि न्यूजीलैंड सरकार कूटनीति और वार्ता के जरिए एक स्थिर नीति अपना रही है, हालांकि वह निजी तौर पर अपनी चिंताएं चीन को बताती रही है। उन्होंने कहा- ‘मानवाधिकार जैसे मसलों को निरंतरता के साथ और देश से जुड़े प्रश्नों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कुछ समय ऐसा हम उन देशों के साथ मिलकर करते हैं जिनसे हमारा विचार मिलता है, और कभी हम ऐसा अकेले करते हैं।’
पर्यवेक्षकों के मुताबिक ध्यान देने की बात यह है कि माहुटा ने ये बयान ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मेरिज पेन की न्यूजीलैंड यात्रा से ठीक पहले दिया है। पेन बुधवार को न्यूजीलैंड आएंगे, जहां उनकी माहुटा और प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डेन से मुलाकात होगी। ऑस्ट्रेलिया के इन दिनों चीन के साथ संबंध बिगड़े हुए हैँ। ऑस्ट्रेलिया एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा बन कर उभरा है। ये खेमा जिस समय अधिक से अधिक देशों को लामबंद करने की कोशिश में है, उसके बीच न्यूजीलैंड का अलग और नरम रुख अपनाना ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ पूरे अमेरिकी खेमे के लिए परेशानी की बात साबित हो सकती है। दूसरी तरफ चीन के लिए इसे राहत की बात समझा जा रहा है।