न्यूजीलैंड की मस्जिद में 49 लोगों का हत्यारा मुस्लिमों से बदला लेना चाहता था। उसने अपनी मंशा एक दिन पहले ही सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए 74 पेज के मैनिफेस्टो में जाहिर की थी। इसका शीर्षक है, ‘द ग्रेट रिप्लेसमेंट’ यानी महान बदलाव। इसमें उसने लिखा कि वह एक 28 वर्षीय श्वेत राष्ट्रवादी ऑस्ट्रेलियाई है, जो प्रवासियों से नफरत करता है। वह यूरोप में मुस्लिमों द्वारा किए हमलों का बदला लेना और खौफ पैदा करना चाहता है। हालांकि उसका दावा है कि उसने यह सब प्रसिद्धि पाने के लिए नहीं किया।
ब्रेंटन टेरेंट के नाम से सोशल मीडिया एकाउंट पर यह मैनिफेस्टो पोस्ट किया गया है। उसने लिखा कि जब वह 2017 में पश्चिमी यूरोप की यात्रा कर रहा था, तब घटी एक घटना ने उसे हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया। स्टॉकहोम में उज्बेक मूल के शख्स ने भीड़ पर ट्रक चढ़ा दिया, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले में 11 साल की स्वीडिश बच्ची की मौत से वह बेहद आहत था। इसके बाद जब वह फ्रांस में हुए हमलों के बाद उसने बदला लेने की ठानी। तीन महीने पहले उसने क्राइस्टचर्च को निशाना बनाने की साजिश रचनी शुरू की थी। उसने लिखा कि उसने पहले एक मस्जिद को निशाना बनाने की साजिश रची थी, लेकिन बाद में अल नूर और दूसरी मस्जिद को चुना।
पाकिस्तान और उत्तर कोरिया की थी यात्रा
खबरों के मुताबिक, बेरेंट ने बिटकॉइन के जरिये काफी पैसे कमाए और 2011 में दुनिया की सैर पर निकल गया। कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया और पाकिस्तान समेत कई देशों की यात्रा की थी। इस दौरान उसके अनुभवों ने भी उसे हिंसा का रास्ता चुनने पर मजबूर किया। टेरेंट को जानने वाली एक महिला ने बताया कि लगता है कि इस यात्राओं के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिससे वह कट्टरपंथी बन गया। टेरेंट ने फेसबुक पर पाकिस्तान यात्रा का जिक्र किया था। उसने लिखा कि एक अविश्वसनीय जगह जहां दुनिया के काफी अच्छे और उदार लोग रहते हैं।
शारीरिक तौर पर था फिट
टेरेंट के पिता एथलीट थे और उनसे ही उसे फिट रहने की प्रेरणा मिली थी। टेरेंट को जानने वाले जिम मैनेजर ने बताया कि वह नियमबद्ध तरीके से खाना खाने और कसरत करने का शौकीन था। उसके साथ जिम करने वाले लोगों ने बताया कि कभी भी उसके मुंह से राजनीतिक या धार्मिक बातें नहीं सुनी थीं।
नॉर्वे की घटना की याद दिलाता है मैनिफेस्टो
कोपेनहेगन। स्वीडिश विशेषज्ञ ने कहा कि न्यूजीलैंड के हमलावर का मैनिफेस्टो 2011 में नॉर्वे में हमले को अंजाम देने वाले चरमपंथी द्वारा लिखे गए मैनिफेस्टो की तरह ही भावनाओं को व्यक्त करता है। नॉर्वे के ओस्लो में हमले को अंजाम देने वाले हमलावर ब्रेविक ने हमले से पहले 1500 पेज का मैनिफेस्टो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। विशेषज्ञ मैग्नस रेनस्ट्रॉप ने कहा कि न्यूजीलैंड के हमलावर ने दावा किया है कि वह ब्रेविक से सहानुभूति रखने वालों के संपर्क में था। वह भी प्रवासियों के खिलाफ था और ब्रेविक की तरह ही हमले को अंजाम देना चाहता था।
हमले से सिहर उठा शांत रहने वाला न्यूजीलैंड
क्राइस्टचर्च। क्राइस्टचर्च में हुए हमले से न्यूजीलैंड ही नहीं पूरी दुनिया स्तब्ध है। न्यूजीलैंड की पहचान बेहद शांत देश के तौर पर होती है। अमेरिका से बिल्कुल उलट यहां फायरिंग की घटना बिल्कुल नहीं होती। यहां तक की न्यूजीलैंड के पुलिसकर्मी भी अक्सर अपने साथ गन नहीं रखते। हमलावर ने लिखा था कि न्यूजीलैंड जैसे शांत देश में हमले से यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि धरती पर कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है।