चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियों की सैंपलिंग और अनुमान लगाने के तरीकों पर हाल के वर्षों में लगातार सवाल उठे हैं। लेकिन अब ब्रिटेन में हुए एक खुलासे से यह सवाल भी उठा है कि क्या ऐसी एजेंसियां जानबूझ कर चुनाव नतीजों को प्रभावित करने के लिए गलत अनुमान बताती हैं?
यूगोव के पूर्व पॉलिटिकल रिसर्च मैनेजर क्रिस कर्टिस ने बताया है कि 2017 में इस एजेंसी को जो असल आंकड़े प्राप्त हुए, उससे लेबर पार्टी के पक्ष में माहौल का संकेत मिलता था। इसलिए कंपनी ने इस पर आधारित अपने अनुमान को दबा दिया। 2017 में वामपंथी नेता जेरमी कॉर्बिन लेबर पार्टी के नेता थे। समझा जाता है कि कॉरपोरेट सेक्टर और ब्रिटेन का अभिजात्य वर्ग कॉर्बिन को प्रधानमंत्री बनने से रोकना चाहता था। कर्टिस ने अब कहा है- ‘आंकड़ों पर आधारित अनुमान लगाने से संभावित प्रतिक्रिया को लेकर हर कोई घबरा गया।’ यूगोव के आंकड़ों से किसी भी दल को बहुमत ना मिलने की सूरत दिख रही थी। यह भी संकेत मिल रहा था कि कॉर्बिन के नेतृत्व में लेबर पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहेगा। बाद में असली चुनावी नतीजे इसी के अनुरूप आए।
यूगोव ने अपने पूर्व कर्मचारी के आरोप के खंडन किया है। लेकिन पत्रकार टिम शिपमैन की एक किताब में आए विवरण के मुताबिक यूगोव के सह-संसथापक और कंजरवेटिव पार्टी के तत्कालीन सांसद नेधिम जहावी ने तब यूगोव के प्रमुख स्टीफन शेक्सपियर को फोन कर धमकी दी थी कि अगर बाद में चुनाव पूर्वानुमान गलत साबित हुए, तो वे शेक्सपियर से इस्तीफे की मांग करेंगे। जहावी इस समय बोरिस जॉनसन सरकार में शिक्षा मंत्री हैँ।
कर्टिस ने कहा है- ‘बाद में आखिरी सर्वे की विधि में एक ‘छोटा’ बदलाव लाया गया, जिससे कंजरवेटिव पार्टी की बढ़त दिखने लगी। यह बदलाव ऊपर के अधिकारियों की तरफ से डाले गए दबाव के कारण लाया गया।’
जहावी ने कर्टिस के इस खुलासे को एक ‘जोक’ (चुटकुला) बताया है। लेकिन समझा जाता है कि इस घटनाक्रम ने चुनाव पूर्व सर्वे करने वाली एजेंसियों की साख पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं।