फ्रांस के संसदीय चुनाव राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पार्टी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक अधिक संभावना इस बात की है कि मैक्रों की पार्टी ला रिपब्लिक एन मार्श अपना बहुमत गंवा देगी।
विश्लेषकों का कहना है कि इस बार चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी हैं। इसलिए नई संसद के बारे में ठोस भविष्यवाणी कर पाना सर्वे एजेंसियों के लिए भी मुश्किल बना हुआ है। लेकिन ऐसी संभावना जताई है कि मैक्रों की पार्टी पूर्ण बहुमत पाने में नाकाम रह सकती है। सबसे ताजा सर्वे इस हफ्ते मंगलवार को जारी हुआ। आईफॉप नाम की एजेंसी के इस सर्वे में मैक्रों की पार्टी को 250 से 290 के बीच सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। जबकि पूर्ण बहुमत के लिए 289 सीटों की जरूरत होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मैक्रों के लिए अधिक चिंता की बात यह है कि बीते अप्रैल के बाद से उनकी पार्टी के लिए जन समर्थन में गिरावट आई है। अप्रैल में आईफॉप ने ला रिपब्लिक एन मार्श को 275 से 310 के बीच सीटें मिलने की भविष्यवाणी की थी। वेबसाइट पोलिटिको.ईयू ने कई ओपिनियन पॉल के औसत के आधार पर कहा है कि मैक्रों की पार्टी को 275 से 318 के बीच सीटें मिल सकती हैं। लेकिन इस वेबसाइट के विश्लेषण में भी कहा गया है कि हाल के हफ्तों में ट्रेंड ला रिपब्लिक एन मार्श के समर्थन में गिरावट का रहा है।
जानकारों की राय है कि अगर मैक्रों की पार्टी को 289 सीटें नहीं मिलीं, तो नेशनल असेंबली में गतिरोध की स्थिति बन जाएगी। तब राष्ट्रपति के लिए अपने किसी एजेंडे को पारित कराना मुश्किल हो जाएगा। उस हाल में उनके लिए शासन करना बेहद कठिन हो जाएगा। ये बात मैक्रों सरकार में संसदीय समन्वय विभाग के मंत्री ओलिवर वेरॉन ने भी स्वीकार की है। बुधवार को उन्होंने कहा- ‘मैं मतदाताओं से हाथ जोड़ कर गुजारिश करता हूं कि वे देश में संस्थागत संकट खड़ा ना करें। वैसा हुआ तो देश में शासन करना संभव नहीं रह जाएगा।’