न्यू मैक्सिको से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां के सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के सभी स्कूलों में होने वाले भेदभाव पर मुकदमा दायर करने का रास्ता साफ कर दिया। इसके तहत अब आचरण, किसी भी प्रकार की नस्लवादी टिप्पणी या फिर अन्य चिजों के लिए होने वाले भेदभाव के खिलाफ आसानी से मुकादमा दायर किया जा जकता है।
सुनाए गए फैसले से न्यू मैक्सिको मानवाधिकार अधिनियम (एनएमएचआरए) के तहत स्कूलों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही अदालत ने भेदभाव को लेकर ये भी कहा कि सार्वजनिक स्कूल सभी बच्चों के लिए खुले होने चाहिए और उनमें भेदभाव नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को पलटा
मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि न्यू मैक्सिको में पब्लिक स्कूलों को भेदभाव से मुक्त रखना राज्य के संविधान में स्पष्ट रूप से तय किया गया है। यह फैसला इस बात को भी समर्थन करता है कि पब्लिक स्कूलों को सभी बच्चों के लिए खुले रखना जरूरी है। इसके अलावा, अदालत ने अपने 1981 के एक पुराने फैसले को पलटते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थान, जैसे विश्वविद्यालय, भी सार्वजनिक स्थल के रूप में गिने जाते हैं और वहां भी भेदभाव को रोकना जरूरी है।
स्कूलों में भेदभाद की घटनाएं
बता दें कि यहां के स्कूलों में छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार की घटना कोई नहीं बात नहीं है। ऐसा ही कुछ साल 2018 में अल्बुकर्क के एक हाई स्कूल में हुआ था जब एक शिक्षक ने एक अमेरिकी मूल के छात्रा का बाल काट दिए और दूसरी छात्रा पर नस्लवादी टिप्पणी की थी। साथ ही एक और घटना में न्यू मैक्सिको के अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन ने अल्बुकर्क पब्लिक स्कूल पर भेदभाव का आरोप लगाया था। जहां एक शिक्षक मैरी जेन ईस्टिन ने हैलोईन प्ले दौरान छात्रों से गलत व्यवहार किया। इसके तहत शिक्षक छात्रों से सवाल पूछती थी,और सही उत्तर देने वाले छात्रों को मार्शमैलो देंती थी वहीं गलत उत्तर देने वालों को कुत्ते का खाना खिलाती थीं।
हालांकि इन घटनाओं के बाद, कई लोगों ने महसूस किया कि स्कूलों में भेदभाव और नस्लीय असंवेदनशीलता के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। हालांकि अब कोर्ट के इस फैसले से राज्य में सार्वजनिक स्कूलों को भेदभाव से बचाने के लिए और सख्त कानून लागू हो सकेंगे।
स्कूल अधिकारी ने स्वीकारा फैसला, लेकिन..
न्यू मैक्सिको सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर राज्य के स्कूल अधिकारियों में निराशा है। उनका मानना है कि कोर्ट का यह फैसला कानून का गलत तरीके के विस्तार कर रहा है। हालांकि उनके पास इस फैसले को स्वीकार करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था, इसलिए उन्होंने इस फैसले को स्वीकार किए हैं।
छात्रा ने कोर्ट के फैसले को बताया सही
वहीं दूसरी ओर स्कूल की छात्रा वादी मैकेंजी जॉनसन ने इस फैसले को सही बताया है। छात्रा ने कहा कि यह शिक्षकों के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए, ताकि वे सांस्कृतिक संवेदनशीलता को समझें और सभी छात्रों के लिए एक सम्मानजनक माहौल बनाएं।