भारत के समान चीन में भी मेडिकल कर्मचारियों पर हमले और हिंसक वारदातें होती रही हैं। हाल ही में एक महिला डॉक्टर को एक मरीज के परिजन द्वारा चाकू मारने के बाद चीन में नया कानून बनाया गया है जिसमें किसी भी व्यक्ति या संगठन के किसी मेडिकल कर्मचारी को धमकाने, गरिमा को ठेस पहुंचाने अथवा शारीरिक क्षति पहुंचाने पर रोक लगाई गई है।
चीन के सरकारी मीडिया चायना डेली के मुताबिक यह कानून चीन में एक जून 2020 से लागू होगा जिसमें मेडिकल से जुड़े माहौल में बाधा डालने वालों या मेडिकल कर्मचारियों की सुरक्षा अथवा गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों को कैद व सख्त जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
चीनी मेडिकल एसोसिएशन ने एक बयान में डॉक्टरों के लिए कार्यस्थल को सुरक्षित बनाने की मांग की थी। इस बीच चीनी ऑनलाइन न्यूज पोर्टल सीजीटीएन के अनुसार अकेले 2018 में ही चीन में कम से कम 12 मेडिकल हिंसा के मामले सामने आए जिनमें दो मेडिकल कर्मचारियों की जान चली गई।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बेहद कम
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में इन हादसों के पीछे एक बड़ा कारण स्वास्थ्य क्षेत्र में कम निवेश का होना भी है। चीन में विश्व की कुल आबादी का 22 फीसदी हिस्सा बसता है, लेकिन यहां दुनिया भर में सेहत पर होने वाले कुल खर्च का सिर्फ दो फीसदी ही होता है।