मंजू बोरा और फिल्म निर्माता डैन वोलमैन
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
इस्राइली फिल्म निर्माता डैन वोलमैन ने नई फिल्म मर्डर्स टू क्लोज, लव टू फार में भारतीय फिल्म निर्माता मंजू बोरा के साथ मिलकर 2012 में हुए निर्भया दुष्कर्म और उसकी हत्या के घटनाक्रम पर बनाई है। वोलमैन ने कहा, वह जब 2012 में भारत यात्रा पर आए, तब दिल्ली में एक फिजियोथेरेपी इंटर्न (निर्भया) के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हो रहे थे। फिल्म की प्रेरणा उन्हें वहीं से मिली।
फ्लोच, माई माइकल, ऐन इस्राइली लव स्टोरी और वैली ऑफ स्ट्रेंथ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर वोलमैन ने मंजू बोरा के साथ मिलकर इस मर्डर मिस्ट्री का सह-निर्देशन किया है। यह ऐसी पहली फिल्म है जिसका सह-निर्माण भारत और इस्राइली फिल्मकारों ने किया है। इसे 24वें पुणे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (पीआईएफएफ) में प्रदर्शित किया जाएगा। वोलमैन ने कहा, निर्भया कांड भयावह घटना थी।
ये भी पढ़ें- Trump: 'ग्रीनलैंड के पीएम के लिए दिक्कत बढ़ने वाली है', डेनमार्क के साथ तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
फिल्म की शूटिंग भारत में हुई
वोलमैन ने कहा, फिल्म की शूटिंग भारत में हुई है और इसमें यौन उत्पीड़न, हिंसा, भ्रष्टाचार, समूह के व्यवहार, गिरोह और भीड़ की मानसिकता जैसे विषयों को उठाया गया है। वह बोले, ये मुद्दे इस्राइल में भी उतने ही आम हैं जितने दुनिया के अन्य हिस्सों में। मैंने अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और चीन में फिल्में बनाई हैं और सभी मिलती-जुलती कहानियों, मुद्दों और समस्याओं का सामना करते हैं।
फिल्म की पूरी शूटिंग भारत में की गई है।
- कहानी वास्तविक सामाजिक मुद्दों से प्रेरित है।
- फिल्म में यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर विषय को उठाया गया है।
- हिंसा को समाज की एक बड़ी समस्या के रूप में दिखाया गया है।
- भ्रष्टाचार की भूमिका को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है।
- समूह के व्यवहार और लोगों के सामूहिक फैसलों पर फोकस किया गया है।
- गिरोहबंदी और अपराध की मानसिकता को दर्शाया गया है।
- भीड़ की मानसिकता और उसके खतरनाक प्रभावों को उजागर किया गया है।
ये भी पढ़ें- Trump: 'लोगों की हत्या नहीं, उनको आजाद देखना चाहता हूं’, ईरान में जारी प्रदर्शन के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ये समस्याएं केवल भारत तक सीमित नहीं हैं- डैन वोलमैन
- उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दे इस्राइल में भी उतने ही आम हैं।
- ये समस्याएं दुनिया के कई देशों में देखने को मिलती हैं।
- वोलमैन ने अमेरिका में भी इसी तरह के विषयों पर फिल्में बनाई हैं।
- यूरोप में भी उन्हें समान सामाजिक चुनौतियां देखने को मिलीं।
- अफ्रीका में काम करते समय भी यही समस्याएं सामने आईं।
- चीन में बनी फिल्मों में भी मिलते-जुलते सामाजिक मुद्दे दिखे।
- फिल्म वैश्विक समाज की सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करती है।
- यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि समाज के आईने की तरह है।
अन्य वीडियो-