यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को रूस पर नए प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसका मकसद रूस के 200 जहाजों के उस बेड़े को निशाना बनाना है, जो पश्चिम की ओर से लगाए प्रतिबंधों से बचकर अवैध रूप से तेल और गैस का परिवहन कर रहा है। यह प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध को लेकर लगाए गए थे।
ईयू ने कुल 189 जहाजों को निशाना बनाया और कई रूसी अधिकारियों व कंपनियों पर संपत्ति जब्त करने और यात्रा प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। इन सभी उपायों का ब्रसेल्स में ईयू के विदेश मंत्रियों ने समर्थन किया। ईयू 27 देशों का समूह है।
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ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्ला ने कहा, (रूस के) राष्ट्रपति पुतिन शांति की बात का दिखावा कर रहे हैं, इसलिए नए प्रतिबंध तैयार किए जा रहे हैं। रूस और उसके मददगारों को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। रूस अपने इन जहाजों का उपयोग केवल तेल और गैस नहीं, बल्कि यूक्रेन से लूटे गए अनाज को ढोने में भी करता है। अब तक ईयू कुल करीब 350 ऐसे जहाजों को निशाना बना चुका है।
यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों की ओर से मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगाए जाने से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की फोन पर बातचीत हुई थी। हालांकि, इसमें तीन साल पुराने युद्ध को समाप्त करने में कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली।
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडेफुल ने कहा, हमने कई स्पष्ट कहा है कि हमें रूस से अब एक ही चीज चाहिए-एक बिना शर्त और तत्काल युद्धविराम। उन्होंने कहा, हमें खुशी है कि यूक्रेन अब भी इसके लिए तैयार है। लेकिन यह देखकर निराशा होती है कि रूस ने अब तक यह निर्णायक कदम नहीं उठाया है और हमें इसका जवाब देना होगा।
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कूटनीतिक कोशिशों से अब तक युद्ध रोकने में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है, जिसमें सोमवार की ट्रंप और पुतिन की फोन पर बातचीत और शुक्रवार को इस्तांबुल में रूस-यूक्रेन प्रतिनिधिमंडल की सीधी बातचीत भी शामिल है। फोन पर बातचीत के दौरानपुतिन ने ट्रंप से कहा कि रूस भविष्य के एक संभावित शांति समझौते के लिए रूपरेखा तय करने वाले एक मसौदे पर यूक्रेन के साथ काम करने के लिए तैयार है।
कार्नेगी रूस यूरेशिया केंद्र की वरिष्ठ विश्लेषक तातियाना स्तानोवाया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'लगता है कि पुतिन ने ऐसा तरीका खोज लिया है, जिससे शांति प्रयासों की झलक तो मिले लेकिन असल में रूस को कोई बड़ा नुकसान न हो।
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