क्या बोला पीटर खलील ने?
इस दौरान पीटर खलील ने पीएम मोदी की पिछली ऑस्ट्रेलिया यात्रा का भी जिक्र किया। साथ ही सिडनी में 25,000 भारतीयों के कार्यक्रम को याद करते हुए भारतीय प्रवासी समुदाय की प्रशंसा की। खलील ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इंडो-पैसिफिक में साझा दृष्टिकोण है, जो खुला, स्थिर और समृद्ध क्षेत्र होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आर्थिक, मानवीय और रक्षा ये तीन स्तंभ दोनों देशों की साझेदारी की बुनियाद हैं। इसके साथ ही 2022 में लागू हुए आर्थिक सहयोग समझौते (ईसीटीए) और रक्षा अभ्यास तावीज कृपाण में भारत की भागीदारी को भी उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया।
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तकनीकी सहयोग पर बड़ा जोर
इसके अलावा राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी समूह पहले से ही टोड एरे सेंसर पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में क्वांटम टेक्नोलॉजी, AI, साइबर सुरक्षा, सूचना युद्ध और अन्य उन्नत तकनीकों पर भी सहयोग बढ़ेगा। भारत ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारतीय रक्षा उद्योग में सह-विकास और सह-निर्माण के लिए आमंत्रित किया है, जैसे कि पनडुब्बी ड्रोन, फ्लाइट सिमुलेटर और एडवांस मटेरियल्स।