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IND-AUS: पानी के नीचे चलने वाले वाहन से लेकर रक्षा उत्पादन तक, इन क्षेत्रों में भारत-ऑस्ट्रेलिया का सहयोग तय

Fri, 10 Oct 2025 09:25 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिडनी

सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिडनी में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना बेस का दौरा किया और ऑस्ट्रेलिया के सहायक रक्षा मंत्री पीटर खलील संग द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान खलील ने 12 साल में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली यात्रा को ऐतिहासिक बताया गया। दोनों नेताओं ने रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

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ऑस्ट्रेलिया दौरे पर राजनाथ सिंह - फोटो : एक्स@rajnathsingh
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विस्तार
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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी बेस एचएमएएस कुट्टाबुल का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के सहायक रक्षा मंत्री पीटर खलील मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी, तकनीकी सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता पर गहन चर्चा की। इस दौरान पीटर खलील ने राजनाथ सिंह की यात्रा को ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की यह पहली यात्रा है। हमें उम्मीद है कि अगली यात्रा इतने लंबे अंतराल के बाद नहीं होगी। वहीं राजनाथ सिंह ने भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते रिश्ते पर जोर दिया। 

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भारत-ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंध- राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कहा कि कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सह-निर्माता बन चुके हैं। उन्होंने 2024 में हुई शिखर बैठक और 2+2 वार्ता का हवाला देते हुए कहा कि संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। राजनाथ सिंह ने लोकतंत्र, विविधता और स्वतंत्रता जैसी समानताओं को दोनों देशों के रिश्ते की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ (लगभग $18 बिलियन) तक पहुंच चुका है, जो पिछले वर्ष से 18% अधिक है।

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विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को लेकर क्या बोले राजनाथ सिंह
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा निर्यात अब तेजी से बढ़ रहा है और पिछले साल यह ₹23,622 करोड़ (करीब $2.76 बिलियन) तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि भारतीय रक्षा कंपनियां अब करीब 100 देशों को अपने उत्पाद निर्यात कर रही हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को उदार बनाया है। अब 74% तक विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट से और उससे अधिक निवेश सरकारी मंजूरी के जरिए किया जा सकता है, खासकर जब निवेश से अत्याधुनिक तकनीक भारत में आती हो।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का डिफेंस प्रोडक्शन इकोसिस्टम लगातार आसान और अनुकूल बनाया जा रहा है, ताकि विदेशी और घरेलू निवेशकों को अधिक सुविधा मिल सके। नीति सुधारों और प्रक्रियाओं को सरल कर भारत को बिजनेस फ्रेंडली डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

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क्या बोला पीटर खलील ने?

इस दौरान पीटर खलील ने पीएम मोदी की पिछली ऑस्ट्रेलिया यात्रा का भी जिक्र किया। साथ ही सिडनी में 25,000 भारतीयों के कार्यक्रम को याद करते हुए भारतीय प्रवासी समुदाय की प्रशंसा की। खलील ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इंडो-पैसिफिक में साझा दृष्टिकोण है, जो खुला, स्थिर और समृद्ध क्षेत्र होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आर्थिक, मानवीय और रक्षा ये तीन स्तंभ दोनों देशों की साझेदारी की बुनियाद हैं। इसके साथ ही 2022 में लागू हुए आर्थिक सहयोग समझौते (ईसीटीए) और रक्षा अभ्यास तावीज कृपाण में भारत की भागीदारी को भी उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया।

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तकनीकी सहयोग पर बड़ा जोर
इसके अलावा राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी समूह पहले से ही टोड एरे सेंसर पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में क्वांटम टेक्नोलॉजी, AI, साइबर सुरक्षा, सूचना युद्ध और अन्य उन्नत तकनीकों पर भी सहयोग बढ़ेगा। भारत ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारतीय रक्षा उद्योग में सह-विकास और सह-निर्माण के लिए आमंत्रित किया है, जैसे कि पनडुब्बी ड्रोन, फ्लाइट सिमुलेटर और एडवांस मटेरियल्स।

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