- यह वायरस के अन्य रूपों की बहुत तेजी से जगह ले रहा है, अर्थात यह तेजी से फैल रहा है।
- इसमें ऐसे म्यूटेशन हैं जो वायरस के हिस्से को प्रभावित करते हैं, जो महत्वपूर्ण हैं।
- इनमें से कुछ म्यूटेशन ऐसे हैं जो कोशकाओं को ज्यादा संक्रमित करने की क्षमता रखते है।
हालांकि, अभी भी इस मामले में वैज्ञानिक पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 जीनोमिक्स यूके कन्सोर्टियम के प्रोफेसर निक लोमान का कहना है, इन सभी के बारे में पक्की जानकारी के लिए प्रयोगशालाओं में प्रयोग किए जाने की जरूरत है, लेकिन क्या आप इसके परिणाम के लिए हफ्तों या महीनों का इंतजार कर सकते हैं? शायद इन परिस्थितियों में तो नहीं।'
ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन की पहचान सबसे पहले सितंबर में हुई थी। नवंबर में लंदन के करीब एक चौथाई मामले नए स्ट्रेन से संक्रमण के थे। वहीं, दिसंबर के मध्य तक यह संख्या दो तिहाई हो गई थी। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के अनुसार वायरस का यह नया प्रकार पहले के मुकाबले 70 फीसदी तक अधिक संक्रामक है।
इस बारे में इंपीरियल कॉलेज लंदन के डॉ. एरिक वोल्ज कहते हैं, 'अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी... लेकिन जो हम देख रहे हैं उससे पता चलता है कि यह बहुत तेजी से फैल रहा है। यह पहले के प्रकारों के मुकाबले काफी तेजी के साथ फैल रहा है, लेकिन जरूरी है कि इस पर नजर बनी रहे।'
माना जा रहा है कि नया स्ट्रेन या तो ब्रिटेन के ही किसी मरीज में उत्पन्न हुआ होगा या किसी अन्य देश से आया होगा। इसे उत्तरी आयरलैंड के अलावा पूरा लंदन में पाया गया है, लेकिन लंदन, दक्षिण-पूर्वी और उत्तरी ब्रिटेन में इससे संक्रमित मामले सबसे ज्यादा हैं। पूरी दुनिया में वायरस सैंपल के जेनेटिक कोड्स पर नजर रखने वाले संगठन नेक्स्टस्ट्रेन के अनुसार, डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटेन से आए मामले पाए गए हैं। नीदरलैंड में भी मामले मिले हैं। दक्षिण अफ्रीका में भी कोरोना वायरस का एक नया स्ट्रेन मिला है जिसमें ब्रिटेन जैसे ही कुछ म्यूटेशन मिले हैं लेकिन उससे अलग है।
जी हां, इस वैश्विक महामारी के केंद्र चीन के वुहान में जिस वायरस की सबसे पहले पहचान हुई थी, पूरी दुनिया में फैसे वायरल से वह अलग है। फरवरी में यूरोप में एक म्यूटेशन की पहचान की गई थी। इसे डी614जी नाम दिया गया था। इसके अलावा एक म्यूटेशन यूरोप में पाया गया था, जिसे ए222वी नाम दिया गया था।
वायरस के नए प्रकार के बारे में एक शुरुआती विश्लेषण प्रकाशित हो चुका है। इसमें 17 तरह के महत्वपूर्ण परिवर्तनों की पहचान होने की बात कही गई है। वायरस के स्पाइक प्रोटीन में बदलाव आया है। आपको बता दें कि वायरस पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन एक तरह की चाबी होते हैं जो मानव शरीर की कोशिकाओं में वायरस के प्रवेश के लिए रास्ता तैयार करते हैं।
एक म्यूटेशन स्पाइक के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से 'रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन' को बदलता है। इस म्यूटेशन को एन501वाई कहा गया है। प्रो, लोमान के अनुसार यह काफी अहम है। एक अन्य म्यूटेशन एच69/वी70 है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रो. रवि गुप्ता द्वारा किए गए कार्यों से पता चला है कि इस म्यूटेशन से प्रयोगशालाओं में वायरस की संक्रामकता दो गुना बढ़ी दिखी।
अभी तक इस बाते के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस का नया प्रकार पहले के मुकाबले अधिक घातक या जानलेवा है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि निगरानी बहुत जरूरी है। अगर वायरस अधिक घातक नहीं भी है तो भी संक्रामकता बढ़ने से मामलों की संख्या बढ़ेगी और अस्पतालों पर कार्यभार भी बढ़ेगा।
इस बारे में अभी तक वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस पर वैक्सीन पूरी तरह असरदार रहेगी। दरअसल, वैक्सीन हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को इस तरह तैयार करती हैं कि वह वायरस के विभिन्न भागों पर हमला कर उसे नष्ट कर सके। इसलिए अगर स्पाइक का कोई हिस्सा म्यूटेट भी हुआ होगा तो भी वैक्सीन उस पर असर करेगी। हालांकि, प्रो. गुप्ता कहते हैं कि अगर वायरस में और म्यूटेशन हुए तो यह चिंता की बात हो जाएगी।