नेपाल के मोरांग इलाके में एक स्कूल शिक्षक की हत्या ने यहां ये चर्चा छेड़ दी है कि क्या नेपाल पर फिर से माओवादी हिंसा का साया गहरा रहा है। उस शिक्षक का कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (चांद गुट) के कार्यकर्ताओं ने पहले अपहरण किया और बाद में उनकी हत्या कर दी। चांद गुट के नेता नेत्र बिक्रम चांद हैं।
ये गुट उस माओवादी पार्टी से निकला है, जो अब मुख्यधारा में शामिल हो गई है। नेपाल को 1990 के दशक मध्य से 2006 के बीच माओवादी विद्रोह का सामना करना पड़ा था। उस दौरान 13 हजार से अधिक लोग मारे गए, सैकड़ों लोग लापता हुए और हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा था।
नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने पिछले साल चांद गुट को अपराधी समूह घोषित कर उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसके पहले राजधानी काठमांडू में हुए दो बम धमाकों में इस गुट का हाथ माना गया था। उन धमाकों में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। उसके पहले ओली सरकार ने चांद गुट को बातचीत का न्योता दिया था। लेकिन इस गुट ने न्योता ठुकरा दिया। उसका कहना था कि जब तक उसे एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता नहीं दी जाती, वह सरकार के साथ बातचीत में शामिल नहीं होगा।
बताया जाता है कि 54 वर्षीय शिक्षक राजेंद्र कुमार श्रेष्ठ ने चांद गुट के एक राजनीतिक संगठन होने के दावे पर सवाल उठाया था। इसका बदला लेने के लिए उनकी हत्या कर दी गई। उनका शव क्षत-विक्षत अवस्था में पाया गया। उनकी हत्या गला रेत कर की गई थी।
यहां के सुरक्षा विशेषज्ञों ने पहले हुए धमाकों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन शिक्षक की हत्या जिस तरह की गई, उसके बाद वे भी देश में आतंक का माहौल लौटने का अंदेशा जताने लगे हैं। पुलिस के डीआईजी हेमंत मल्ला ने कहा कि कोई राजनीतिक संगठन इतने क्रूर ढंग से किसी व्यक्ति की हत्या नहीं कर सकता। उन्होंने ये बात स्वीकार की कि प्रशासन चांद गुट से प्रभावी ढंग से निपट पाने में नाकाम रहा है।
चांद 2012 तक पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली माओवादी पार्टी से जुड़े हुए थे। लेकिन तब वे मोहन वैद्य और राम बहादुर थापा के साथ इस पार्टी से अलग हो गए। इन तीनों नेताओं ने तब आरोप लगाया था कि दहल ने बीच रास्ते में ही “जन युद्ध” का रास्ता छोड़ दिया। चांद ने 2014 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल नाम से अपना अलग दल बना लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दहल ने 2006 में मुख्यधारा में शामिल होकर जन क्रांति का रास्ता छोड़ दिया था और ये दावा किया अब उन्होंने उस रास्ते को पुनर्जीवित किया है।
वैद्य और थापा 2016 दहल की पार्टी में लौट गए। 2018 में थापा ओली के मंत्रिमंडल में शामिल हो गए और अब देश के गृह मंत्री हैं। गृह मंत्री बनने के बाद से थापा ने चांद गुट के प्रति सख्त रुख अपनाया है। जबकि चांद गुट लगातार हिंसक गतिविधियों में लगा रहा है। उस पर निजी कंपनियों पर हमले करने और उनसे फिरौती वसूलने का भी आरोप है।
शिक्षक की हत्या के बाद गृह मंत्री थापा ने पुलिस, सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि सरकार ने चांद गुट की ताकत को कम करके आंकने की गलती की है। यहां के अखबार कांतिपुर में राजनीतिक विश्लेषक गेजा शर्मा वागले ने लिखा है कि चांद गुट से पेश आए खतरे के मद्देनजर सरकार सुरक्षा के पूरे इंतजाम करने में विफल रही है। हालांकि बीते समय में चांद गुट के कुछ कार्यकर्ता सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए हैं, लेकिन उससे इस गुट की गतिविधियों पर रोक नहीं लगी है।
चांद गुट अब पार्टी को माओवादी नहीं कहता। लेकिन जानकारों के मुताबिक इसकी गतिविधियां पुरानी माओवादी पार्टी की जैसी ही हैं। माओवादी पार्टी ने एक दशक तक देश में बड़ी हिंसा की थी। अब जानकारों का कहना है कि फिर से वही खतरा देश पर मंडरा रहा है।