प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को कहा है कि इस्राइल पर किसी भी तरह के हमले पर हम जोरदार जवाब देंगे। यह बात नेतन्याहू ने हमास नेता इस्माइल हानियेह और बेरूत में एक वरिष्ठ हिजबुल्लाह नेता की हत्या के बाद कही है।
नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल ने पिछले कुछ दिनों में हमास और हिजबुल्लाह सहित ईरान के प्रतिनिधियों को करारा झटका दिया है। हालांकि इस दौरान उन्होंने हनियेह की हत्या का जिक्र नहीं किया।
हनियेह की हत्या के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा
हनियेह की हत्या के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। इस्राइल से बदला लेने की धमकियां दी जा रहीं हैं, ऐसे में गाजा में हो रहा संघर्ष मध्य पूर्व में एक व्यापक युद्ध में बदल सकता है।
नेतन्याहू ने एक टीवी पर दिए बयान में कहा कि आने वाले दिन इस्राइल के नागरिकों के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। बेरूत में हमले के बाद से हर तरफ से धमकी सुनाई दे रही है। हम किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं और हम किसी भी खतरे के खिलाफ एकजुट और दृढ़ संकल्पित रहेंगे।"
स्माइल हानिया की ईरान में हत्या कर दी गई
हमास के राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की बुधवार सुबह ईरान में हत्या कर दी गई। ईरान के अर्धसैनिक बल ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि, अबतक किसी भी देश के खुफिया एजेंसी ने हानिया की हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है। आशंका है कि इस हमले को इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अंजाम दिया है।
कब हुई मोसाद की स्थापना
मोसाद की स्थापना इस्राइल में 13 दिसंबर, 1949 में की गई थी। इस्राइल सरकार ने मोसाद का गठन आतंकवाद से लड़ने के लिए किया था। बाद में 1951 में मोसाद को इस्राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया गया। इसकी रिपोर्टिंग भी प्रधानमंत्री को ही होती है।