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नेपाल त्रासदी: प्रधानाचार्य ने 1643 बच्चों की जिंदगी बचाई, सलाम कर रहे लोग; तीन मंजिला स्कूल पूरा बह गया

Mon, 31 Aug 2026 09:17 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क, ब्यूरो/एजेंसी।

सार

  • नेपाल की त्रासदी में जान बचा रहे लोगों / देवदूतों को सलाम कर रहे लोग।
  • तीन मंजिला स्कूल पूरा बह गया, प्रधानाचार्य ने 1643 बच्चों की जिंदगी बचा ली।
  • रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सेना सुरंग तक पहुंच गई है। पाइप से ऑक्सीजन और भोजन भेजा जा रहा है।
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नेपाल में तबाही के बीच प्रधानाचार्य की चर्चा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- ग्राफिक्स
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विस्तार
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नेपाल में सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। नेपाली सेना ने कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 361 श्रमिकों को सुरक्षित निकाला है। पर, रसुवा व नुवाकोट में अब भी 898 कामगार फंसे हुए हैं। नुवाकोट की त्रिशूली-3ए परियोजना में जवान सुरंग में छेद बनाकर अंदर पहुंचे, पर वहां कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बचावकर्मियों ने छह इंच का छेदकर पाइप से ऑक्सीजन व भोजन भेजा है।

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सैन्य अफसरों के मुताबिक, त्रिशूली-3ए में 35 कर्मचारियों के फंसे होने का अनुमान है। चार किमी लंबी सुरंग में रोशनी, हवा के लिए चार छेद किए गए हैं। इसके जरिये सुरंग में जाने पर सात मीटर व्यास वाले हिस्से में काफी ऊंचाई तक पानी भरा मिला। ड्रिलिंग व ब्लास्ट के जरिये सुरंग का छेद बड़ा कर कामगारों तक पहुंचने की तैयारी है। भारत-चीन के विशेषज्ञ भी लोगों को बचाने के अभियान में मदद दे रहे हैं।

  • त्रिशूली-3ए सुरंग में फंसे हैं  35 श्रमिक...898 कामगार कई अन्य सुरंगों में फंसे हैं।

तबाही के बीच नुवाकोट के त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी ने सूझबूझ से 1643 बच्चों की जिंदगी बचा ली। दोस्त से बाढ़ की चेतावनी मिलते ही उन्होंने घंटी बजाकर स्कूल आ चुके 900 बच्चों व शिक्षकों को ऊंचे स्थानों पर भेज दिया।

700 से अधिक बच्चे पैदल और बसों से स्कूल की ओर आ रहे थे। उन्होंने बसों से संपर्क कर वहीं से लौटने को कहा। एक बस स्कूल के पास पुल तक पहुंच चुकी थी। 47 साल के दवाड़ी ने उसे वापस भेजा। जैसे ही बस पुल के दूसरी ओर पहुंची, पुल बह गया। कुछ ही देर में त्रिशूली नदी के सैलाब में तीन मंजिला स्कूल भवन पूरी तरह बह गया।

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अब तक 788 मौतों की पुष्टि, 2500 से अधिक लापता
नेपाल में 26 अगस्त को आई आपदा में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है। 2,502 लोग लापता हैं। इनमें 512 विदेशी नागरिक हैं। अब तक 9435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। अपनों को खोजने के लिए लोग तस्वीरें लेकर अस्पतालों के सामने खड़े हैं। शवों की पहचान के लिए आए परिजन अपना दर्द छिपा नहीं पा रहे।
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दिल्ली में रहने वाले नेपाली भी मदद के लिए तत्पर, जुटाए 90 लाख
अपने परिवार और परिचितों की सलामती जानने के लिए लोग लगातार संपर्क कर रहे हैं। कई लोग अपनों को खो चुके हैं, जबकि कइयों के परिजन अब भी लापता हैं। ऐसे मुश्किल समय में दिल्ली में रहने वाले नेपाली मूल के लोगों ने अपनी कमाई से नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। दिल्ली में नेपाली मूल के करीब दो से तीन लाख लोग रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या में नौकरी और दूसरे काम करने वाले लोगों की है। दिल्ली में नेपाली समुदाय से जुड़ी करीब 23 संस्थाएं सक्रिय हैं। इन संस्थाओं ने मिलकर अब तक करीब 90 लाख रुपये जुटाए हैं। यह राशि नेपाल के प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजी गई है। मित्र मंच मानव कल्याण समिति के महासचिव कांशीराम आचार्य ने बताया कि 90 लाख रुपये का योगदान आपदा के सामने भले ही छोटा हो, लेकिन समुदाय अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहा है। संस्थाओं का लक्ष्य करीब दो करोड़ रुपये जुटाकर नेपाल भेजना है। दिल्ली-नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष युबराज बराल ने बताया कि दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों से नेपाल की मदद के लिए आगे आने की अपील की जा रही है।

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