27 मई को काठमांडो स्थित एक कॉन्फ्रेंस हॉल में नेपाल के 10 और चीन के करीब एक दर्जन अधिकारी व वैज्ञानिक जुटे थे, तब नेपाल ने एक ही गुहार लगाई, तिब्बत की सीमा पर स्थित ग्लेशियरों की हलचल, झीलों के जलस्तर और लैंडस्लाइड का रियल टाइम डेटा हमारे साथ साझा कीजिए ताकि आपदा की स्थिति में अपने लोगों की जान बचा सकें। पर चीन ने वो हाइड्रोलॉजिकल डाटा उपलब्ध नहीं कराया।
बैठक के ठीक तीन माह बाद आई जल प्रलय ने ऐसी जानकारी को साझा करने की अहमियत को साफ कर दिया है। नेपाल सरकार भविष्य के खतरों को देखते हुए अब चीन के साथ भारत की तर्ज पर औपचारिक डाटा-शेयरिंग समझौता करने की तैयारी कर रही है। नेपाली हाइड्रोलॉजिस्ट बिनोद पराजुली कहते हैं, भारत के साथ नदियों के जलस्तर को लेकर बहुत सुचारू डाटा-शेयरिंग सिस्टम है। अब हम चीन को भी वैसा ही प्रस्ताव भेजेंगे ताकि हर 10 मिनट में हमें नदियों और ग्लेशियरों की रीडिंग मिले।
सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिशें तेज
जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिशें लगातार जारी हैं। बचाव कर्मी 933 कर्मियों और कामगारों की तलाश में जुटे हैं, जिनमें 600 से अधिक लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। 279 को बचाया जा चुका है। नेपाली सेना ने अपर त्रिशूली-3ए की सुरंग तक पहुंचने के लिए भारी मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों का इस्तेमाल किया।
पूर्व जज वी शिवज्ञानम लापता
मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज वी शिवज्ञानम का कुछ पता नहीं चल पाया है। वह तमिल श्रद्धालुओं के समूह के साथ नेपाल गए थे और 26 अगस्त के बाद से परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो सका है।
मलबे के नीचे जिंदगी की आवाज, सुरक्षित निकाला
नेपाल में सैकड़ों मौतों और मलबों में दबे होने के बीच रसुवा से जिंदगी की उम्मीद जगाने वाली तस्वीर सामने आई है। तिमूरे गांव में मिट्टी और मलबे के नीचे दबे रहने के बावजूद छह साल की बच्ची जिंदा मिली। पुलिस को मलबे के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। जवानों ने तत्काल मिट्टी हटाकर बच्ची को निकाला। बच्ची मिट्टी से लथपथ थी। चेहरा साफ करने पर उसकी आंखों की चमक ने जवानों को भावुक कर दिया। वहीं, तीन साल का मासूम तकरीबन 50 घंटे बाद भी सुरक्षित मिला। प्रलय में वह मां-बाप से अलग हो गया था और जंगल में रोता मिला। मां-बाप का अभी पता नहीं चल सका है।
939 हुए मृतक, 4 हजार से अधिक लोग लापता
आपदा के छठे दिन मृतकों की संख्या बढ़कर 939 हो गई है। 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान चला रहे हैं। सर्वाधिक 279 मौतें चितवन में हुई हैं।
जो 10 सेकंड में खतरा भाप भाग पाए उनकी बची जान
रसुवा के सीमा शुल्क अधिकारी कर्बीर गायरे ने बताया, सुबह 8:45 बजे भूकंप जैसा झटका लगा। देखा तो चीन की तरफ से सैलाब आता दिखा। चिल्लाकर कहा, बाढ़ आ रही, भागो। 0 सेकंड में सब बह गया, जो इतनी देर में ऊंचाई की ओर भाग पाए, उनकी जान बची। सुबह 9:15 से 9:16 बजे तक रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और चितवन के इलाकों में 6 लाख चेतावनी एसएमएस भेजे गए थे।
सुख-दुख में साथ...राजनाथ ने दूतावास जाकर शोक जताया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास पहुंचकर बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने शोक पुस्तिका में लिखा कि भारत सुख-दुख का साथी बनकर नेपाल के साथ खड़ा है और खोज, बचाव तथा पुनर्वास के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा। भारत ने राहत सामग्री के साथ 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम और सुरंग बचाव दल भी भेजा है। भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि रसुवा के चिलिमे गांव से 3 भारतीय नागरिकों और उनके एक नेपाली सहकर्मी को नेपाली सेना ने बचाया है।