नेपाल में आई त्रासदी के बाद चीन को ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे दुनिया के सबसे बड़े डैम पर अपने ही विशेषज्ञों से अहम सलाह मिली है। चीनी विशेषज्ञों के मुताबिक डैम के प्रमुख हिस्सों को रीडिजाइन करने की जरूरत है।
चीन की सरकारी पत्रिका सेडिमेंट्री जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी के हाल के लेख के अनुसार भूवैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि यहां के भूभाग की संरचना ढीली और जुड़ाव कमजोर है।
मजबूत दीवारें और प्रमुख तत्वों को फिर से डिजाइन करने की सिफारिश
भू-भाग की हलचल या भूकंप से बड़े पैमाने पर अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है। लेखकों ने बांध की सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाने व आपदा के जोखिम को कम करने के लिए जलाशय की ढलानों को मजबूत करने, पानी के तेज बहाव, मिट्टी या पत्थरों को रोकने के लिए मजबूत दीवारें और प्रमुख तत्वों को फिर से डिजाइन करने की सिफारिश की है।
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जा रहा विशाल बांध
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग सांगपो) पर चीन द्वारा बनाए जा रहे 60,000 मेगावाट क्षमता वाले मेदोग सुपर डैम को लेकर भूवैज्ञानिकों और रणनीतिक विशेषज्ञों ने भारत की सुरक्षा, खेती और आबादी के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। 167 अरब डॉलर की लागत से यह बांध बनाया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ध्यान देने की जरूरत : चेलानी
भारत के अग्रणी भू-रणनीतिक विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी प्रोजेक्ट सिंडिकेट और द ग्लोब एंड मेल के हालिया लेखों में कहा है जब किसी साम्यवादी शासन के तहत काम करने वाले वैज्ञानिक इस तरह की चेतावनी जारी करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।
नेपाल में जलप्रलय के बाद बीमारियों का खतरा, त्रासदी से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें-
बांध हिमालयी भूकंपीय क्षेत्र में
ब्रह्मपुत्र नदी के विशाल मोड़ पर यह बांध बन रहा है, जहां नदी भारत में प्रवेश करने से पहले दुनिया की सबसे गहरी और लंबी घाटी से होकर तीव्र गति से नीचे गिरती है। यह बांध हिमालयी भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है, जो भारतीय और यूरेशियन विवर्तनिक प्लेटों के धीमी गति से होने वाले टकराव से बना है। यह पृथ्वी के सबसे अधिक भूकंप संभावित क्षेत्रों में से एक है, जहां विनाशकारी भूकंपों का इतिहास रहा है।