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India-Nepal Relations: भारत की सख्ती से नेपाल के चाय उद्योग को करोड़ों का नुकसान, सरकार से दखल देने की मांग

Mon, 22 Jun 2026 09:25 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, काठमांडू

सार

भारत द्वारा आयातित चाय के लिए कड़े गुणवत्ता मानक लागू किए जाने के बाद नेपाल का चाय उद्योग संकट में आ गया है। इलाम जिले के करीब 100 चाय कारखाने बंद हैं और लाखों किलो हरी चाय की पत्तियां बर्बाद हो रही हैं। नेपाली कांग्रेस नेता भीष्मराज आंगदाम्बे ने सरकार से भारत के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
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चाय बागान - फोटो : Freepik
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विस्तार
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नेपाल की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देने वाले चाय उद्योग पर इन दिनों संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भारत द्वारा आयातित चाय के लिए सख्त गुणवत्ता जांच लागू किए जाने के बाद नेपाली चाय का निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे देश के चाय उत्पादकों और उद्योगों की चिंता बढ़ गई है।

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नेपाली कांग्रेस के नेता ने की सरकार से अपील
नेपाली कांग्रेस के नेता भीष्मराज आंगदाम्बे ने सरकार से इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए भारत के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू करने की अपील की है। इलाम नगर पालिका के 18वें आम सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चाय उद्योग की समस्या का जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर हजारों किसानों और मजदूरों पर पड़ेगा। दरअसल, पिछले सप्ताह से नेपाली चाय उत्पादकों ने अनिश्चितकाल के लिए उत्पादन रोक दिया है। उनका कहना है कि भारत की नई गुणवत्ता जांच प्रक्रिया के कारण चाय का निर्यात बाधित हो रहा है। भारत नेपाली चाय का सबसे बड़ा खरीदार है, इसलिए इस फैसले का सीधा असर उद्योग पर पड़ा है।

भारत नेपाली चाय का सबसे बड़ा खरीदार
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि इलाम जिले के करीब 100 चाय उद्योग 15 जून से बंद पड़े हैं। चाय उत्पादकों के मुताबिक हर दिन लाखों किलो हरी चाय की पत्तियां खेतों और फैक्ट्रियों में बर्बाद हो रही हैं, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
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'सरकार मामले में नहीं दिखा रही सक्रियता'
आंगदाम्बे ने आरोप लगाया कि सरकार इस समस्या को लेकर पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष कई बार संसद में यह मुद्दा उठा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनके अनुसार भारत के साथ समय रहते बातचीत शुरू न कर पाना सरकार की बड़ी कमजोरी है।

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 गहरा सकता है आर्थिक संकट 
चाय उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो नेपाल के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक संकट और गहरा सकता है। ऐसे में सभी की नजर अब सरकार की अगली रणनीति और भारत-नेपाल के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।

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