नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं की सुनवाई के लिए न्यायाधीशों की वरिष्ठता के आधार पर संविधान पीठ गठित करने पर मंगलवार को सहमति जताई है। इस मामले में न्यायाधीशों के बीच मतभेद के चलते सुनवाई स्थगित की जा चुकी है।
द हिमालयन टाइम्स अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पांच सदस्यीय संविधान पीठ के अध्यक्ष प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिशन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के कामकाज के नियम में संशोधन करेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के सहमत होने पर एक सप्ताह के भीतर नियमों में संशोधन किए जाने की उम्मीद है। वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्ण मान शाक्य ने मीडिया से कहा, यह संशोधन न्यायाधीशों की वरिष्ठता के आधार पर पीठ का गठन सुनिश्चित करेगा। खबर के अनुसार इस घटनाक्रम के बाद, मामले से संबंधित याचिकाओं पर फिलहाल सुनवाई स्थगित होने के आसार हैं।
सुनवाई पर मतभेद
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना था कि दो सांविधानिक बेंच के न्यायमूर्ति तेज बहादुर केसी और बाम कुमार श्रेष्ठ को प्रतिनिधि सभा भंग करने के मामले में खुद को अलग करना चाहिए या नहीं। लेकिन मतभेद के चलते फैसला नहीं हुआ। दोनों ने कहा, हमें इस मामले में सुनवाई से कोई अनुताप नहीं। लेकिन दो अन्य जज दीपक कुमार कार्की व आनंद मोहन भट्टाराई ने इन जजों का साथ नहीं दिया और सुनवाई टाल दी गई।