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Nepal Social Media Ban Removed: विरोध-हिंसा के बाद नेपाल सरकार का यू-टर्न, सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध हटाए

Tue, 09 Sep 2025 12:35 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू।

सार

देश में हुए व्यापक विरोध और हिंसक प्रदर्शन के बाद नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। देश में भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले युवाओं के आक्रोश और गहराते संकट के बीच सरकार ने देर रात कहा कि सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध हटा लिए गए हैं। जानिए इस मामले से जुड़े अपडेट
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर बढ़ रहा दबाव (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेपाल सरकार ने हिंसक प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाने का एलान किया है। प्रतिबंध हटाने की घोषणा पीएम केपी शर्मा ओली की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने की। भ्रष्टाचार, असमानता और घोटालों के आरोप लगाते हुए देश की जनता ने संसद तक पहुंच कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। युवाओं के गुस्से की आग से संकट को गहराता देख सरकार ने सोमवार देर रात कैबिनेट बैठक बुलाई। बता दें कि नेपाल की पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 340 से अधिक घायल भी हुए हैं।

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इस कारण नेपाल की सरकार के खिलाफ गुस्से में है जनता
युवाओं के बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने के कारण इसे जेन-जी का आंदोलन कहा जा रहा है। जनाक्रोश के कारण नेपाल सरकार पर संकट गहरा गया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। इस आंदोलन का तात्कालिक कारण भले ही सोशल मीडिया पर पाबंदी बना है, लेकिन इसके मूल में देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और असमानता है।

सरकार सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकने के पक्ष में नहीं
प्रतिबंध हटने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं जेन-जी पीढ़ी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई दुखद घटना से बहुत दुखी हूं। हमें विश्वास था कि हमारे बच्चे शांतिपूर्वक अपनी मांगों को उठाएंगे, लेकिन निहित स्वार्थों के कारण विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ हुई। इस कारण उत्पन्न स्थिति के परिणामस्वरूप नागरिकों की जान का दुखद नुकसान हुआ है... सरकार सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकने के पक्ष में नहीं थी और इसके इस्तेमाल के लिए माहौल सुनिश्चित करेगी।'
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जांच समिति का गठन किया जाएगा, 15 दिनों में रिपोर्ट
उन्होंने कहा, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए प्रदर्शन करते रहने की कोई जरूरत नहीं थी। बिगड़ते हालात को ऐसे ही जारी नहीं रहने दिया जाएगा... मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हिंसा और नुकसान, कारणों की जांच और विश्लेषण के लिए एक जांच समिति का गठन किया जाएगा। 15 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की सिफारिश की जाएगी।

नेपाल में सरकार के खिलाफ आक्रोश, काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान हिंसा - फोटो : ANI
सरकार को प्रतिबंध के निर्णय पर खेद नहीं
सोमवार देर रात हुई कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने कहा कि सरकार को अपने पहले के निर्णय पर खेद नहीं है, लेकिन आंदोलन को देखते हुए प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं। नेपाल में सोशल मीडिया के इस्तेमाल का रास्ता दोबारा खोला जा रहा है। उन्होंने 'जेन-ज़ी' (युवाओं के समूह) से आंदोलन खत्म करने की अपील भी की।

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नेपाल में प्रदर्शन - फोटो : Amar Ujala
प्रतिबंध के समर्थन में सरकार की दलील
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, स्नैपचैट, पिंटरेस्ट और एक्स (पूर्व ट्विटर) समेत कई प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार ने कहा कि ये कंपनियां नए नियमों के तहत पंजीकरण की समयसीमा का पालन नहीं कर सकीं, इसलिए बैन लगाया जा रहा है। सरकार ने यह भी कहा था कि फर्जी आईडी, नफरत फैलाने वाली सामग्री, धोखाधड़ी और साइबर अपराध रोकने के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।

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केपी शर्मा ओली, नेपाल के प्रधानमंत्री - फोटो : X / @PM_nepal_
सोशल मीडिया पर बैन के मुद्दे  पर पीएम ओली ने क्या जवाब दिया
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश की संसद में यह मुद्दा उठाए जाने पर कहा था कि 'एक्स' ने नेपाल की संप्रभुता का सम्मान नहीं। अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के स्वामित्व वाले इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बारे में नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि एक्स ने नेपाल में पंजीकरण से इनकार कर दिया। सरकार बीते डेढ़ साल से सभी सोशल मीडिया कंपनियों से पंजीकरण कराने की अपील कर रही थी, लेकिन ऐसा नहीं कराया गया। नतीजतन सरकार को प्रतिबंध लगाने पड़े।
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नेपाल में विरोध प्रदर्शन - फोटो : पीटीआई
क्या है पूरा मामला, कहां से पनपा आक्रोश?
बता दें कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हजारों युवाओं ने काठमांडू की सड़कों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करते भी दिखे। पुलिस को हालात नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार, डंडों और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों के हाथों में 'भ्रष्टाचार बंद करो, सोशल मीडिया नहीं', 'सोशल मीडिया अनब्लॉक करो' जैसे नारे लिखे पोस्टर भी देखे गए। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में पीएम ओली की सरकार में शामिल मंत्रियों और अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की कई खबरें सामने आई हैं।इन खबरों के बाद जनता के बीच आक्रोश पनप रहा है। हिंसा में हुई मौतों और घायल प्रदर्शनकारियों की खबरों के बाद देश में संकट गहराता देख संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी चिंता जताई। यूएन ने निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग की है।
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