नेपाल की शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को आदेश दिया कि गुरुवार तक जांच पूरी की जाए, वरना केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक को रिहा किया जाए। दोनों नेताओं पर जेन-जी आंदोलन को दबाने का आरोप है, जिसमें 76 लोगों की मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अधिकारियों को सख्त आदेश दिया। कोर्ट ने अधिकारी से कहा, या तो जांच पूरी करो या फिर केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक को रिहा करो। ओली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष हैं और लेखक नेपाली कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।
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दोनों नेताओं पर आरोप क्या हैं?
दोनों नेताओं को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने 8 और 9 सितंबर के जेन-जी आंदोलन को दबाने में भूमिका निभाई। इस आंदोलन में 76 लोगों की मौत हुई थी। रविवार को जिला अदालत ने उनकी हिरासत बढ़ा दी थी। यह तीसरी बार बढ़ाई गई थी। पुलिस ने जांच के लिए और समय मांगा था। नई अवधि गुरुवार को खत्म हो रही है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने आदेश दिया। बेंच में जस्टिस बिनोद शर्मा और सुनील कुमार पोखरेल थे। उन्होंने कहा कि अब जांच अवधि और नहीं बढ़ेगी।
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जांच पूरी करो, कानूनी कार्रवाई करो, वरना दोनों को रिहा करो: सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष कोर्ट ने स्पष्ट कहा, जांच पूरी करो और कानूनी कार्रवाई करो। अगर ऐसा नहीं कर सकते, तो नियम के अनुसार दोनों को रिहा करो। अगर अभियोजन का फैसला होता है, तो आगे की प्रक्रिया शुरू की जाए। अगर नहीं होता, तो रिमांड खत्म होते ही दोनों को छोड़ना होगा।
यह फैसला अदालत में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर आया। ये याचिकाएं ओली और लेखक की ओर से दायर की गई थीं। वरिष्ठ वकील दिनेश त्रिपाठी ने कहा, संभावना है कि गुरुवार को दोनों को जमानत मिल सकती है।
अंतरिम सरकार में बने आयोग ने की थी कार्रवाई की सिफारिश
सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने एक जांच आयोग बनाया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दोनों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। उन्हें मौतों के लिए जिम्मेदार माना गया।
अस्पताल में भर्ती हैं केपी शर्मा ओली
75 साल के ओली इस समय अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें कई बीमारियां हैं। पुलिस उनका बयान अस्पताल में ही दर्ज कर रही है। वहीं,, 62 साल के लेखक का बयान पुलिस हिरासत में लिया जा रहा है। दोनों की गिरफ्तारी तब हुई, जब नई सरकार बनी। यह सरकार बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में है। पहली कैबिनेट बैठक में ही जांच रिपोर्ट लागू करने का फैसला लिया गया।