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नेपाल: प्रचंड ने बिगाड़ा ओली सरकार का गणित, वापस लिया समर्थन, पीएम कैसे बचाएंगे अपनी कुर्सी?

Thu, 06 May 2021 07:35 AM IST
दीप्ति मिश्रा पीटीआई, काठमांडू

सार

नेपाल में पुष्प कमल दहल प्रचंड की पार्टी ने आखिरकार औपचारिक रूप से ओली सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार अब नेपाली संसद की प्रतिनिधि सभा में अल्पमत में आ गई है।
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
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विस्तार
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नेपाल में सियासी खींचतान से जूझ रहे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार बुधवार को अल्पमत में आ गई। दरअसल पुष्पकमल दहल प्रचंड की अगुवाई वाले गुट सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। दरअसल, प्रधानमंत्री ओली ने 10 मई को विश्वास प्रस्ताव पेश करने का निर्णय लिया है, इस घोषणा के ठीक दो दिन बाद पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया।

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पार्टी ने संसदीय सचिवालय में इस आशय का पत्र देकर समर्थन वापस लेने की घोषणा की। माओइस्ट सेंटर के मुख्य सचेतक देव गुरुंग ने समर्थन वापसी का पत्र सौंपा। उसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार ने संविधान की अवमानना की है और हाल की उसकी गतिविधियों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरा पैदा हो गया है।

पार्टी ने ओली सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया है। समर्थन वापसी के बाद सरकार प्रतिनिधिसभा में अल्पमत में आ गई है। निचले सदन में माओइस्ट सेंटर के पास 49 सांसद हैं। 275 सदस्यीय सदन में सत्ताधारी सीपीएन-यूएमएल को 121 सांसदों का समर्थन है। ओली को अपनी सरकार बचाने के लिए 15 सांसदों की कमी पड़ रही है।
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विश्वासमत प्राप्त करेंगे ओली
प्रचंड के नेतृत्व वाली पार्टी ने ओली सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला ऐसे समय आया है, जब ओली ने दो दिन पहले घोषणा की थी कि वह 10 मई को संसद में विश्वासमत प्राप्त करेंगे। माओवादी सेंटर के निचले सदन में कुल 49 सांसद हैं। चूंकि, सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल के कुल 121 सांसद हैं प्रधानमंत्री ओली के पास 275 सदस्यीय सदन में अपनी सरकार बचाने के लिए 15 सांसद कम हैं। 

इस बीच, ओली बुधवार को मुख्य विपक्षी नेता नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के बूढानीलकंठ स्थित आवास पहुंचे ताकि सरकार बचाने के लिए उनका समर्थन मिल सके। नेपाली कांग्रेस के करीबी सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने देश के नवीनतम राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा की।

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