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नेपाल के 'अन्ना हजारे' समाजसेवी डॉ. गोविन्द केसी सरकार के खिलाफ करेंगे अनशन, भूख हड़ताल का एलान

Mon, 25 May 2020 04:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

  • केसी ने सरकार पर नया नक्शा जारी करके राष्ट्रवाद का झूठा नाटक करने का आरोप लगाया
  • संकट की घड़ी में जरूरी सवालों को नजरअंदाज कर सियासत में लगी है सरकार
  • डॉ. गोविन्द केसी को माना जाता है नेपाल का अन्ना हजारे, कई बार कर चुके हैं भूख हड़ताल
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Dr. Govind KC - फोटो : Social Media (सांकेतिक)
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विस्तार
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नेपाल और भारत में नए सिरे से छिड़े सीमा विवाद और नेपाल की ओर से जारी नए नक्शे को लेकर वहां के जाने-माने समाजसेवी डॉक्टर गोविन्द केसी ने सरकार के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है।
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डॉ. केसी ने नेपाल सरकार पर ऐसे संकट के वक्त में देश की जनता का ध्यान रखने की बजाय बेवजह राष्ट्रवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया है और इसके खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठने का एलान किया है।

डॉ गोविन्द केसी को भारत के अन्ना हजारे जैसा समाजसेवी माना जाता है। वे पेशे से ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, लेकिन तमाम जरूरी सवालों पर सरकार के खिलाफ कई बार गांधीवादी तरीके से आंदोलन और अनशन करते रहे हैं।

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उनके सहयोगी डॉ सुमन आचार्य ने कहा है कि डॉ केसी आगामी दो जून से धारचुला में दो दिनों के लिए अनशन और भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उनका मकसद सरकार का ध्यान देश की जरूरी समस्याओं की ओर दिलाना है और कोरोना संकट के दौरान सीमा से हो रहे पलायन को रोकना है।

डॉ केसी का आरोप है कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में सीमाई इलाकों की अनदेखी कर रही है, जिससे इस संकट के दौर में भी लोग पलायन को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह ऐसे वक्त में राष्ट्रवाद का नाटक बंद करे।

डॉ केसी का कहना है कि ऐसे संकट के वक्त सरकार को आम लोगों से कोई मतलब नहीं है, वह तमाम तरह के भ्रष्टाचार में घिरी है और नेपाली जनता के लिए काम करने की जगह किसी तरह कुर्सी बचाने की राजनीति में लगी है।

उनका कहना है कि देश के सुदूर इलाकों में लोग बीमारियों से पीड़ित हैं, संक्रमण के शिकार हैं और लगातार बढ़ते जा रहे लॉकडाउन से उनके लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

ऐसे में सरकार उनके बारे में सोचने की जगह लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे मसले उठाकर, नया नक्शा जारी करके देश में एक झूठे राष्ट्रवाद का नाटक कर रही है।

काठमांडू की सियासत इसी राष्ट्रवाद की भावना के इर्द-गिर्द घूम रही है। राष्ट्रवाद का नारा बगैर सोचे समझे और समस्या को गहराई से समझे बिना लगाया जा रहा है।

उन्होंने सरकार का ध्यान आम लोगों की परेशानी, उनके स्वास्थ्य और रोजगार जैसे सवालों के साथ साथ सीमाई इलाकों के लोगों के पलायन की ओर दिलाया और कहा है कि सरकार को सबसे पहले इस बारे में सोचना चाहिए।
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डॉ. केसी के अनशन का मकसद डॉक्टर्स की समस्या उठाना भी है और उनका कहना है कि इस बारे में वो पहले कई बार आंदोलन कर चुके हैं।

खासकर वो सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स के साथ हो रहे भेदभाव, पदोनत्तियों में की जा रही गड़बड़ियों और वरिष्ठता को नजरअंदाज जैसे मसले भी उठा रहे हैं।

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