नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की जमीन खिसक रही है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की रविवार को हुई बैठक से यही संकेत मिला। बैठक से जाहिर हुआ कि पार्टी के भीतर ओली अल्पमत में चले गए हैं। ओली के विरोध के बावजूद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सह-अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ने स्थायी समिति की बैठक कराई। अपना विरोध जताने के लिए ओली बैठक में नहीं आए। इसका दहल ने खूब फायदा उठाया। वे बैठक में ओली पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि ओली जानबूझ कर पार्टी की बैठकों में नहीं आ रहे हैं।
लेकिन दहल के भाषण के पहले बैठक में ओली का पत्र पढ़ा गया। इसमें ओली ने दहल गुट पर गलत तरीका अपनाने और पार्टी में विभाजन के बीज डालने का इल्जाम लगाया। अब दहल ने एक हफ्ते में फिर से पार्टी स्थायी समिति की बैठक बुलाने का एलान किया है। उस बैठक का एकमात्र एजेंडा पार्टी में चल रहे अंदरूनी टकराव का हल ढूंढना होगा।
पार्टी प्रवक्ता ने मीडिया से कहा कि सात दिन का समय पार्टी नेताओं को इसलिए दिया गया है ताकि वे सभी राजनीतिक दस्तावेज पढ़ सकें। इनमें प्रधानमंत्री ओली की तरफ से पिछली बैठक में पेश किया गया राजनीतिक दस्तावेज भी शामिल है।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति में 44 सदस्य हैं। रविवार की बैठक से साफ हुआ कि दहल, माधव कुमार नेपाल, झालानाथ खनल, बामदेव गौतम जैसे बड़े नेताओं के गुट ओली के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। इन गुटों से जुड़े स्थायी समिति में 30 सदस्य हैं।
ओली अभी झुकने को तैयार नहीं हैं, इसलिए ऐसा लगता है कि दहल खेमे ने अब बहुमत से फैसले लेने का मन बना लिया है। वह मुद्दों को स्थायी समिति से पार्टी की सेंट्रल कमेटी में ले जाने को तैयार है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि अगर पार्टी ने बहुमत से फैसले लिए, तो उसका विभाजन तय हो जाएगा।
विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के अंदर दरार इतनी चौड़ी हो गई है कि अब सिर्फ चमत्कार से ही पार्टी की एकता बच सकती है। नेपाली मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक रविवार को ओली ने स्थायी समिति की बैठक में जो पत्र भेजा, उसकी भाषा सख्त थी। उसमें हालांकि एकता की अपील की गई, लेकिन साथ ही दहल खेमे को साफ लहजे में चेतावनी भी दी गई।
स्थायी समिति की सदस्य आस्था लक्ष्मी शाक्य ने यहां के अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- अब बात बहुत दूर चली गई है। ओली पत्र भेजकर पार्टी नेताओं को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पार्टी की बैठकें ओली का इंतजार नहीं करेंगी। रविवार की बैठक से ये साफ हो गया कि पार्टी के सामने किसी नेता के अहंकार की कोई कीमत नहीं है।
ये लहजा इस बात का संकेत है कि पार्टी के अंदर कड़वाहट कितनी बढ़ चुकी है। दहल खेमे के नेताओं ने सार्वजनिक बयानों में कहा कि ओली को पार्टी को विभाजित करने की हिम्मत नहीं है। इस खेमे का यह आकलन भी है कि अब ओली के पास प्रधानमंत्री या पार्टी के सह-अध्यक्ष में से किसी एक पद को छोड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ओली मसले को लंबा खींचने की कोशिश करेंगे। वे तब तक दोनों पदों पर बने रहने की कोशिश करेंगे, जब तक ऐसा करना बिल्कुल नामुमकिन ना हो जाए।
पार्टी की सेंट्रल कमेटी में 445 सदस्य हैं। उसमें दहल और माधव कुमार को नेपाल के खेमों का बहुमत है। इसलिए दहल खेमा आश्वस्त है कि जब मुद्दा वहां जाएगा तब जीत उसकी ही होगी। सेंट्रल कमेटी की बैठक पहले 10 दिसंबर को होने वाली थी, लेकिन अब इसकी नई तारीख 20 दिसंबर तय की गई है।
दहल खेमे की नेता मातृका यादव ने कहा है कि दहल पहले ओली को मेलमिलाप से फैसला करने के लिए समझाने की कोशिश करेंगे। ऐसा नहीं हुआ तो बहुमत से फैसला होगा, जिसे ओली को मानना पड़ेगा।