Nepal Politics: Pushp Kamal Dahal and KP Sharma Oli
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नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अपने सहयोगी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के साथ नई सौदेबाजी शुरू कर दी है। इससे सात दलों के मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन में खींचतान पैदा होने की आशंका पैदा हो गई है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता दहल ने अब संकेत दिया है कि राष्ट्रपति चुनाव में वे यूएमएल उम्मीदवार को तभी समर्थन देंगे, जब यह पार्टी उन्हें पूरे पांच साल तक प्रधानमंत्री पद पर बनाए रखने को तैयार हो। जबकि इस महीने दोनों पार्टियों में प्रतिनिधि सभा के मौजूदा कार्यकाल में ढाई-ढाई साल तक सरकार का नेतृत्व करने पर सहमति बनी थी।
नेपाल के निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव के कार्यक्रम का एलान कर दिया है। इसके तहत अगले नौ मार्च को नए राष्ट्रपति का निर्वाचन होगा। 17 मार्च को उप राष्ट्रपति का चुनाव होगा। इस घोषणा के साथ इन दोनों महत्त्वपूर्ण पदों से लिए दांवपेच शुरू हो गया है। वर्तमान स्थिति में कोई पार्टी अपने बूते राष्ट्रपति या उप राष्ट्रपति चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है। सबसे बड़ी दो पार्टियों- नेपाली कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की यूएमएल तभी अपने उम्मीदवार को विजयी बना सकेंगी, जब अन्य पार्टियों का समर्थन उन्हें मिलेगा। माओइस्ट सेंटर इस लिहाज से निर्णायक भूमिका निभा सकती है। विश्लेषकों के मुताबिक दहल अपनी पार्टी की इसी हैसियत का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल में राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति का चुनाव वेटेड वोटिंग सिस्टम से एक इलेक्ट्रॉल कॉलेज द्वारा किया जाता है। इस सिस्टम के तहत अलग-अलग सदनों के सदस्यों के वोट का मूल्य अलग-अलग होता है। दोनों चुनावों के लिए इलेक्ट्रॉल कॉलेज के सदस्यों की संख्या 884 है। इनमें 275 सदस्य संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के, 59 ऊपरी सदन नेशनल असेंबली के और 550 सदस्य सात प्रांतीय असेंबलियों के शामिल हैं। प्रतिनिधि सभा और नेशनल असेंबली के हर सदस्य के वोट का मूल्य 79 होगा, जबकि प्रांतीय असेंबलियों के हर सदस्य के वोट का मूल्य 48 तय हुआ है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक माओइस्ट सेंटर के नेता अब जो दावा कर रहे हैं, वह एक तरह की वादाखिलाफी है। इस महीने सरकार गठन के समय वे इस पर सहमत हुए थे कि राष्ट्रपति पद यूएमएल को मिलेगा। लेकिन अब खुद दहल ने कहा है कि जमीनी स्थितियां बदल गई हैं, इसलिए पुराना वादा बेमतलब हो गया है। प्रतिनिधि सभा में दहल सरकार के विश्वास मत के समय विपक्षी नेपाली कांग्रेस ने भी उनके समर्थन में मतदान किया था। माओइस्ट सेंटर इसे ही जमीनी हालात में बदलाव के रूप में पेश कर रही है।
26 जनवरी को हुई माओइस्ट सेंटर की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में राष्ट्रपति पद को लेकर नए सिरे से आम सहमति बनाने की मांग की गई। जबकि यूएमएल नेताओं ने इस बारे में नए सिरे से बातचीत की संभावना से इनकार किया है। वे दहल को पांच साल का पूरा कार्यकाल दिए जाने की संभावना से भी इनकार कर रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक दोनों पार्टियां अपने रुख पर कायम रहीं, तो सत्ताधारी गठबंधन में दरार पड़ सकती है। उस हाल में देश में नए राजनीतिक समीकरणों की संभावना भी खुल जाएगी।