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Nepal Politics: नेपाल में सियासी सरगर्मी, प्रधानमंत्री से राष्ट्रपति पद तक को लेकर जारी है अनिश्चय

Tue, 20 Dec 2022 02:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

Nepal Politics: नेपाल में राष्ट्रपति का चुनाव एक इलेक्ट्रॉल कॉलेज के सदस्य करते हैं। इस मतदाता मंडल में संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के 275, ऊपरी सदन नेशनल असेंबली के 59, और प्रांतीय असेंबलियों के 550 सदस्य शामिल होते हैं। इस तरह मतदाता मंडल के सदस्यों की कुल संख्या 884 है...
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Nepal Politics: Sher Bahadur Deuba with Bidya Devi Bhandari - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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नेपाल (Nepal Politics) में आम चुनाव के बाद नई सरकार बनाने की चल रही प्रक्रिया के बीच नए राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति पद पर भी विभिन्न नेता अपना दावा जता रहे हैं। नेपाल के संविधान के मुताबिक ये दोनों पद प्रतीकात्मक महत्त्व के हैं। इसके बावजूद वे वरिष्ठ नेता इनमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जिनके प्रधानमंत्री या किसी महत्वपूर्ण विभाग का मंत्री बनने की संभावना नहीं है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जिन नेताओं ने राष्ट्रपति पद बनने में दिलचस्पी दिखाई है, उनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के दो बड़े नेता- माधव कुमार नेपाल और झलानाथ खनाल भी शामिल हैं। उनके अलावा उप-राष्ट्रपति नंद बहादुर पुन, पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई, पूर्व स्पीकर अग्नि सपकोटा और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम चंद्र पौडेल भी यह पाने की कोशिश में बताए जाते हैं। जबकि कुछ खबरों में बताया गया है कि प्रमुख राजनीतिक दलों में एक राय यह भी उभरी है कि यह पद किसी गैर-राजनीतिक व्यक्ति दिया जाना चाहिए।

नेपाल में राष्ट्रपति का चुनाव एक इलेक्ट्रॉल कॉलेज के सदस्य करते हैं। इस मतदाता मंडल में संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के 275, ऊपरी सदन नेशनल असेंबली के 59, और प्रांतीय असेंबलियों के 550 सदस्य शामिल होते हैं। इस तरह मतदाता मंडल के सदस्यों की कुल संख्या 884 है। लेकिन सांसदों और प्रांतीय असेंबलियों के सदस्यों के मतदान का मूल्य अलग-अलग होता है।

संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के वोट का मूल्य 79 है, जबकि प्रांतीय असेंबलियों के सदस्यों के हर वोट का मूल्य 48 है। इस तरह कुल मिला कर इलेक्ट्रॉल कॉलेज में पूरे वोट का मूल्य 52,786 है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अगर सत्ताधारी गठबंधन एकजुट रहता है, तो उसके पास अपनी पसंद का राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनने के लिए पर्याप्त समर्थन है। नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में पांच पार्टियां शामिल हैं। लेकिन इस गठबंधन के एकजुट रहने को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं। खास कर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल के बार-बार बदलते रुख ने अऩिश्चय बना रखा है। आम चर्चा है कि अगर नेपाली कांग्रेस ने दहल को पांच साल के कार्यकाल के पहले हिस्से में प्रधानमंत्री बनाने को राजी नहीं हुई, तो दहल पाला बदल सकते हैं। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव के समीकरण भी बदल जाएंगे। 

इलेक्ट्रॉल कॉलेज में विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के पास 15,202 वोट हैं। जबकि नेपाली कांग्रेस के पास 16,221 वोट हैं। माओइस्ट सेंटर के पास 3,936 वोट हैं। अगर ये वोट यूएमएल के पाले में चले गए, तो फिर कुछ अन्य छोटे दलों को साथ लेकर नया गठबंधन अपना राष्ट्रपति चुनवाने की स्थिति में पहुंच सकता है। खासकर ऐसा तब हो सकता है कि जब यूएमएल और माओइस्ट सेंटर सत्ताधारी गठबंधन में शामिल किसी अन्य दल को अपने साथ लाने में सफल हो गए।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक राष्ट्रपति कौन बनेगा, यह काफी कुछ इस पर निर्भर करेगा कि सत्ताधारी गठबंधन में प्रधानमंत्री पद को लेकर क्या सहमति बन पाती है। 22 दिसंबर को नव निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलवाई जाएगी। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने राजनीतिक दलों के सरकार बनाने के लिए अपना दावा 25 दिसंबर तक पेश करने को कहा है। इसलिए अनुमान है कि इस हफ्ते के बाकी बचे दिन राजनीतिक सरगर्मी से भरपूर होंगे।

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