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Nepal: नेपाल में सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने की मांग, पूर्व पीएम देउबा के बयान से क्यों गरमाई सियासत?

Tue, 18 Aug 2026 04:35 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल अतुल मिश्र/अतुल अवस्थी, काठमांडू

सार

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस नेता शेर बहादुर देउबा ने देश की नई राष्ट्रीय पहचान को सनातन धर्म से जोड़ने की बात कही है। उनके नेतृत्व वाले नेपाली कांग्रेस गुट के राष्ट्रीय सम्मेलन में सनातन धर्म के साथ हिंदू, बौद्ध और किरात परंपराओं के संरक्षण का प्रस्ताव भी पारित हुआ। देउबा के बयान के बाद नेपाल में हिंदू राष्ट्र की बहस फिर क्यों तेज हो गई। इस बयान के बाद क्या बदलने वाला है? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...
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सनातन धर्म को नेपाल की नई पहचान बनाने का प्रस्ताव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने देश की राष्ट्रीय पहचान को सनातन धर्म से जोड़ने की बात कही है। उनके नेतृत्व वाले नेपाली कांग्रेस गुट के 14वें राष्ट्रीय सम्मेलन में इस दिशा में आगे बढ़ने का प्रस्ताव पारित किया गया। इससे नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को राजनीतिक ताकत मिलने की चर्चा शुरू हो गई है। देउबा ने सम्मेलन के समापन समारोह में खुद को हिंदू बताते हुए अपनी राजनीतिक सोच भी साफ की।

प्रस्ताव में किन धार्मिक परंपराओं को जगह दी गई?

पारित प्रस्ताव केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। इसमें सनातन धर्म के साथ हिंदू, बौद्ध और किरात परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया गया है। साथ ही सभी धर्मों और समुदायों की धार्मिक आजादी, सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की बात कही गई है। यानी प्रस्ताव में नेपाल की पारंपरिक धार्मिक पहचान को मजबूत करने के साथ दूसरे समुदायों के अधिकारों की बात भी शामिल है।
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देउबा ने सम्मेलन में क्या कहा?

  • सम्मेलन के दौरान देउबा ने कहा कि वह किसी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें यह कहने का अधिकार है कि वह हिंदू हैं।
  • उन्होंने 'मैं हिंदू हूं' के नारे के साथ अपनी बात रखी।
  • उनके इस बयान को नेपाल में सनातन पहचान और हिंदू राष्ट्र को लेकर चल रही बहस के बीच अहम माना जा रहा है।
  • बयान सामने आने के बाद देश के राजनीतिक माहौल में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

नेपाली कांग्रेस के दूसरे गुट की क्या आपत्ति है?

नेपाली कांग्रेस के दूसरे गुट ने सम्मेलन में पारित प्रस्तावों और दिए गए बयानों पर आपत्ति जताई है। पार्टी प्रवक्ता विनोद चालिसे ने कहा कि सम्मेलन में हुए काम और नेताओं के बयानों पर पार्टी की नजर है। इससे साफ है कि सनातन धर्म और राष्ट्रीय पहचान का मुद्दा केवल नेपाल की व्यापक राजनीति में ही नहीं, बल्कि नेपाली कांग्रेस के भीतर भी मतभेद का कारण बन सकता है।

सम्मेलन में और कौन से प्रस्ताव पारित हुए?

सम्मेलन में देउबा के नेतृत्व में नेपाली कांग्रेस का 15वां महाधिवेशन कराने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सभी राजनीतिक ताकतों से संवाद, जनता की अपेक्षाओं के मुताबिक संविधान में जरूरी संशोधन और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण से जुड़े प्रस्ताव रखे गए। इन प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी एनपी साउद समिति को दी गई है।
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