नेपाल सरकार ने हिंसक हमलों, जबरन वसूली और बम विस्फोट जैसे कामों को अंजाम देने वाले प्रतिबंधित विद्रोही समूह से बृहस्पतिवार को शांति समझौता कर लिया। तीन बिंदुओं वाला यह समझौता सरकार और प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-चंद गुट के बीच हुआ है।
इस समूह के नेता विक्रम चंद ‘बिप्लव’ हैं। शांति समझौते को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, जिनकी सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी पर वर्चस्व की लड़ाई को लेकर प्रचंड गुट से ठनी हुई है।
सरकार ने शांति वार्ता के बाद कहा, हमने समूह से प्रतिबंध हटाने, जेल में बंद उसकी पार्टी के सभी सदस्यों एवं समर्थकों को रिहा करने और उनके खिलाफ सभी कानूनी मामले वापस लेने पर सहमति जताई है, जबकि समूह ने हिंसा का त्याग करने और सभी मसलों को शांतिपूर्ण वार्ता के जरिये सुलझाने पर सहमति दी है।
सरकार के साथ साझा बयान में कहा गया है कि समूह वार्ता के माध्यम से अपने राजनीतिक मुद्दों के समाधान की मांग करेगा और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होगा। सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, समूह के जेल में बंद 100 से ज्यादा लोगों को रिहा किया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी आरोपों को हटा लिया जाएगा।
गौरतलब है कि पार्टी के अध्यक्ष प्रचंड ने बुधवार को अपने गुट की स्थायी समिति और केंद्रीय समिति की बैठक से ओली को संसदीय दल के नेता से हटाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। जल्द ही पार्टी की संसदीय दल की बैठक बुलाकर ओली को औपचारिक रूप से संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया जाएगा।
समझौते के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे ओली और विप्लव
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और विद्रोही समूह के नेता नेत्र विक्रम चंद शुक्रवार को एक संयुक्त समारोह में समझौते की विस्तार से जानकारी देंगे।
राजनीति की मुख्यधारा में शामिल होने पर माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी का छोड़ा साथ
हिंसा करने, धमकियां देने और हड़ताल करने के लिए जाना जाने वाला यह गुरिल्ला और बिप्लव समूह 1996 और 2006 में सरकारी बलों के खिलाफ लड़ने वाली ‘माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी’ से उस समय अलग हो गया था, जब उसने अपना सशस्त्र विद्रोह त्याग दिया था। माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने उस वक्त संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में शांति वार्ता पर सहमति जताई थी और वह राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हो गई थी।
सशस्त्र माओवादियों से संघर्ष में 17,000 की मौत
सशस्त्र माओवादियों के संघर्ष में देश में 17,000 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। विप्लव समूह ने मार्च, 2019 में काठमांडो में एक के बाद एक कई बम धमाकों को अंजाम दिया था। पूरे नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-चंद गुट के 2,000 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता आरोपों का सामना कर रहे हैं।