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Nepal: भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण के दावे पर घिरे PM बालेन; 26 अगस्त को संसद में विपक्ष करेगा सवालों की बौछार

Mon, 17 Aug 2026 11:12 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, काठमांडू

सार

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह 26 अगस्त को प्रतिनिधि सभा में सांसदों के सवालों का जवाब देंगे। विपक्ष लंबे समय से उनके 31 मई के उस बयान पर स्पष्टीकरण मांग रहा है, जिसमें उन्होंने नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण की बात कही थी। 
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बालेन शाह - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अगले सप्ताह प्रतिनिधि सभा में सांसदों के सवालों का सामना करेंगे। सदन के अध्यक्ष डोल प्रसाद आर्याल ने सोमवार को बताया कि प्रधानमंत्री के साथ सीधे सवाल-जवाब का सत्र 26 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। अध्यक्ष ने सदन को बताया कि प्रतिनिधि सभा नियमावली 2026 के अध्याय-9 के तहत प्रधानमंत्री के साथ प्रश्नोत्तर सत्र निर्धारित किया गया है। इस दौरान सदन में मौजूद प्रत्येक राजनीतिक दल से कम से कम एक सांसद प्रधानमंत्री से सवाल पूछ सकेगा। अध्यक्ष ने सांसदों से अपने सवाल संक्षिप्त रखने की अपील भी की।

विपक्ष बालेन शाह से भारत पर दिए बयान का हिसाब मांगेगा

प्रधानमंत्री शाह के संसद में आने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब विपक्ष लंबे समय से उनके एक बयान पर स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है। दरअसल, 31 मई को संसद में अपने पहले संबोधन के दौरान शाह ने कहा था कि उन्हें इस बारे में जानकारी मिली है कि नेपाल ने भारत के क्षेत्र में भी ‘अतिक्रमण’ किया है।

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इसके बाद विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री से इस बयान को स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि नेपाल की ओर से भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण की बात कही गई है तो प्रधानमंत्री को उसके समर्थन में सबूत पेश करने चाहिए या फिर अपना बयान वापस लेना चाहिए।

संसद अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को जवाब देने का निर्देश दिया

विपक्ष की लगातार मांगों के बाद प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष डोल प्रसाद आर्याल ने प्रधानमंत्री को सदन में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए कहा। संसद सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष ने उन मुद्दों पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है जो उनके अधिकार क्षेत्र से जुड़े हैं। आर्याल ने कहा कि सांसद लंबे समय से प्रधानमंत्री से महत्वपूर्ण विषयों और उनके अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों पर सवालों का जवाब देने की मांग कर रहे हैं।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने शाह के बयान पर दी थी सफाई

प्रधानमंत्री के बयान के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने उसकी अलग व्याख्या पेश की थी। मंत्रालय ने कहा था कि शाह की टिप्पणी दोनों देशों के बीच ‘नो-मैन्स लैंड में अतिक्रमण’ और ‘सीमा पार कब्जे’ से जुड़ी थी, न कि किसी क्षेत्र पर औपचारिक दावा करने के संदर्भ में। इसके बावजूद विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री से सदन में सीधे स्पष्टीकरण की मांग करते रहे। अब 26 अगस्त को होने वाला सवाल-जवाब सत्र इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री शाह का पक्ष सामने आने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी पर पहले से विवाद

भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं। भारत ने इस विवाद को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही है। ऐसे में प्रधानमंत्री शाह का संसद में होने वाला सवाल-जवाब सत्र भारत-नेपाल सीमा विवाद और उनके पुराने बयान को लेकर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

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