नेपाल में हाल ही में संपन्न संसदीय चुनाव में 14 महिलाएं संसद के लिए चुनी गई हैं, जो कुल सीटों का करीब आठ प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। इनमें से 13 सीटों पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने जीत दर्ज की है, जबकि एक सीट नेपाली कांग्रेस के खाते में गई है। यह आंकड़ा पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। वर्ष 2022 के चुनाव में केवल 9 महिला उम्मीदवार ही जीत पाई थीं, जो कुल सीटों का करीब 5.45 प्रतिशत थीं।
संविधान में 33% प्रतिनिधित्व का प्रावधान
नेपाल के संविधान में संसद में महिलाओं के लिए कम से कम 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का प्रावधान है, लेकिन अब तक राजनीतिक दल इस लक्ष्य को पूरा करने में सफल नहीं हो पाए हैं। प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत इस बार 14 महिलाओं की जीत के साथ उनका प्रतिनिधित्व लगभग 8.48 प्रतिशत तक पहुंचा है।
नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कुल 275 सीटें हैं। इनमें से 165 सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए चुने जाते हैं, जबकि 110 सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से संसद में आते हैं।
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प्रमुख जीतों में बड़े नेताओं को मिली हार
इस बार चुनाव में कई महिला उम्मीदवारों ने बड़े नेताओं को हराकर जीत हासिल की। इंदिरा रनमागर ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए सीपीएन-यूएमएल के नेता और भंग हुई प्रतिनिधि सभा के स्पीकर देव राज घिमिरे को 48,742 वोटों के अंतर से हराया। रनमागर को 60,110 वोट मिले, जबकि घिमिरे को 11,368 वोट प्राप्त हुए। इसी तरह रुबिना आचार्य ने नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला को बड़े अंतर से पराजित किया। आचार्य को 55,513 वोट मिले, जबकि कोइराला को 12,850 वोट मिले।
प्रचंड की बेटी को भी मिली हार
एक और महत्वपूर्ण मुकाबले में सोबिता गौतम ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की बेटी रेनु दहल को हराया। गौतम को 59,277 वोट मिले, जबकि भरतपुर महानगर की मेयर पद से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने वाली रेनु दहल को 20,615 वोट प्राप्त हुए।
अन्य महिला विजेता
इस चुनाव में जीत दर्ज करने वाली अन्य महिलाओं में निशा डांगी, आशा झा, पुष्पा कुमारी चौधरी, गौरी कुमारी, नीतिमा भंडारी, आशिका तामांग, रंजू न्यूपाने, तोशिमा कार्की, बीना गुरूंग और कोमल ग्यावली शामिल हैं। इसके अलावा 45 वर्षीय वासना थापा नेपाली कांग्रेस की ओर से जीतने वाली एकमात्र महिला उम्मीदवार रहीं।