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Nepal: शादी की न्यूनतम उम्र 20 से 18 साल करने की तैयारी में सरकार, नेपाल में इस अधिनियम में होगा संशोधन

Mon, 24 Mar 2025 09:26 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

नेपाल सरकार ने देश में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं के पीछे शादी की न्यूनतम उम्र के ज्यादा (20 वर्ष) होने का हवाला दिया है। अब सरकार इसे कम करने की तैयारी में है। बता दें कि, पड़ोसी देश में शादी की न्यूनतम उम्र 20 साल से 18 साल करने की तैयारी की जा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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नेपाल सरकार शादी की न्यूनतम उम्र 20 से घटाकर 18 साल करने या बाल विवाह पर सजा कम करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि 20 साल की उम्र सीमा के कारण दुष्कर्म के मामले बढ़े हैं। इसलिए, सरकार बाल अधिनियम और आपराधिक संहिता में संशोधन करने जा रही है।
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संसद सत्र में विधेयक लाने की तैयारी में सरकार
कानून मंत्री अजय चौरेसिया ने कहा, 'सरकार संसद के मौजूदा सत्र में विधेयक लाने की तैयारी में है। हमने इस पर चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से चर्चा की है।' वहीं इस मामले में गृह मंत्री रमेश लेखक ने संसद की कानून, न्याय और मानवाधिकार समिति में बताया कि सरकार इस संशोधन को अंतिम रूप दे रही है। उन्होंने कहा, 'वर्तमान उम्र सीमा काम नहीं कर रही है, इसलिए इसे कम करना जरूरी है।'

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इन विकल्पों पर विचार कर रही है नेपाल सरकार
नेपाल सरकार दो विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला, शादी की न्यूनतम उम्र घटाकर 18 साल करना। दूसरा, 'रोमियो और जूलियट कानून' अपनाना, जो अमेरिका के कई राज्यों में लागू है। इस कानून के तहत यदि दोनों प्रेमी जोड़े की उम्र में 2-3 साल का अंतर हो, तो इसे कानूनी सहमति माना जाएगा।

अभी नेपाल में क्या है नियम?
वर्तमान कानून के अनुसार, नेपाल में शादी के लिए दोनों की उम्र 20 साल होनी चाहिए। यदि कोई इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे तीन साल की जेल और 30,000 रुपये तक जुर्माना हो सकता है। साथ ही, 18 साल से कम उम्र की लड़की से सहमति से संबंध भी दुष्कर्म माना जाता है।  
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पहले भी नियम बदलने का हुआ था प्रयास
2022 में तत्कालीन कानून मंत्री गोविंदा बैंदी ने कहा था कि जब 16 साल में नागरिकता और 18 साल में मतदान का अधिकार मिल सकता है, तो शादी की उम्र 20 साल क्यों होनी चाहिए? हालांकि, तब यह बदलाव नहीं हो सका था। अब सरकार इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने के करीब है और कई सांसद इस बदलाव के समर्थन में हैं।

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