Nepal Government: शेर बहादुर देउबा और केपी शर्मा ओली
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नेपाल में आम चुनाव के पूरे नतीजे इस हफ्ते आ जाने की संभावना है। उम्मीद है कि अगले हफ्ते के आरंभ में निर्वाचन आयोग चुनाव परिणामों की प्रमाणित कॉपी राष्ट्रपति को सौंपेगा। उसके बाद देश में सरकार बनाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक चूंकि किसी दल को साफ बहुमत नहीं मिला है, इसलिए सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
नेपाल में संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा और सात प्रांतों की असेंबलियों के आम चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को हुआ था। तब आयोग ने कहा था कि पूरे चुनाव नतीजे आठ दिसंबर तक आएंगे। लेकिन कई चुनाव क्षेत्रों में मतदान के दौरान गड़बड़ियों के आरोप लगे और दूसरे किस्म के विवाद उठे। इस कारण प्रतिनिधि सभा की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली तीन सीटों पर अभी भी मतगणना चल रही है। उधर आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों के आवंटन की प्रक्रिया भी धीमी गति से चल रही है। इसलिए संभव है कि सारे नतीजे आठ दिसंबर तक ना आ पाएं।
वैसे मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपलिया ने सोमवार को उम्मीद जताई कि आयोग अपनी समयसीमा के अंदर मतगणना प्रक्रिया पूरी करने में सफल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ जिलों में मतगणना पर उठे विवाद को अभी हल नहीं किया जा सका है। थपलिया ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘गुरुवार को हम सभी दलों को पत्र लिख कर कहेंगे कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों के लिए अपने प्रतिनिधियों के नाम वे आयोग को तीन दिन के अंदर सौंप दें। उसके बाद हम राष्ट्रपति को अंतिम चुनाव परिणाम भेज देंगे।’
अब तक हुई मतगणना के मुताबिक सात पार्टियों ने आनुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत प्रतिनिधि सभा में सीटें हासिल करने की कसौटी पार कर ली है। ये पार्टियां हैं- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल), नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, जनता समाजवादी पार्टी और जनमत पार्टी। नेपाल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों के आवंटन की जटिल प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसे सेंटे-लेग (Sainte-Lague) फॉर्मूला कहा जाता है।
राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी को आशा है कि निर्वाचन आयोग 12 दिसंबर को चुनाव परिणाम उन्हें सौंपेगा। इन सूत्रों के मुताबिक चुनाव परिणाम मिलने के दो दिन बाद वे राजनीतिक दलों को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगी। परंपरा के मुताबिक वे पार्टियों को सरकार बनाने का अपना फॉर्मूला पेश करने के लिए 24 घंटों का वक्त देंगी।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक हालांकि चुनाव परिणाम आने में देर हुई है, इसके बावजूद इस बार रफ्तार 2017 के आम चुनाव की तुलना में काफी तेज है। उस समय निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति को चुनाव परिणाम सौंपने में लगभग ढाई महीने लगा दिए थे। तब मतदान सात दिसंबर 2017 को हुआ था, जबकि निर्वाचन आयोग ने 14 फरवरी 2018 को चुनाव परिणाम राष्ट्रपति को सौंपे थे। तब यूएमएल को स्पष्ट बहुमत मिला था, इसलिए एक दिन बाद ही उसके नेता केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिला दी गई थी।