पाकिस्तान की शहबाज शरीफ ने रूस से रियायती दरों पर पेट्रोल, डीजल और कच्चा तेल खरीदने का सौदा कर लिया है। इस कदम को सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के एक बड़े नीति परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। इस वर्ष फरवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद तत्कालीन इमरान खान सरकार ने रूस से ऐसा सौदा करने का इरादा दिखाया था। लेकिन अगले ही महीने इमरान खान देश के अंदर सियासी चुनौतियों में उलझ गए और अप्रैल में उनकी सरकार गिर गई। इमरान खान ने आरोप लगाया था कि रूस से उनके प्रस्तावित समझौते के कारण ही उनकी सरकार गिराने की ‘साजिश विदेश में रची’ गई।
पीडीएम सरकार ने सत्ता में आने के बाद अमेरिका से रिश्ते सुधारने को प्राथमिकता दी है। इसका फायदा भी उसे मिला, जब अमेरिका ने एफ-16 लड़ाकू विमानों के पाट-पुर्जे उसे देने को मंजूरी दे दी और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के ग्रे लिस्ट से उसे बाहर करवाने में मददगार बना। लेकिन अब देश में बढ़ते आर्थिक संकट के बीच पीडीएम सरकार ने रूस से करार कर लिया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी अमेरिका में कड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है। अमेरिका और पश्चिमी देशों की प्राथमिकता रूस को दुनिया में अलग-थलग करना है।
पाकिस्तान के पेट्रोलियम राज्यमंत्री मुसादिक मलिक ने सोमवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस कर रूस से हुए समझौते का एलान किया। रूस यात्रा से लौटे मलिक ने कहा- ‘मैं अपनी सफल रूस यात्रा के लिए देश के आवाम को बधाई देना चाहता हूं। मेरी यात्रा उम्मीद से भी ज्यादा कामयाब रही।’
मलिक के साथ पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मास्को गए थे। उन्होंने कहा कि रूस की निजी कंपनियों से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) खरीदने के लिए भी बातचीत शुरू की गई है। साथ ही रूस से पाकिस्तान तक गैस पाइपलाइन बिछाने से जुड़ी बातचीत में भी महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है।
पाकिस्तान के अखबार द न्यूज ने पिछले हफ्ते खबर दी थी कि रूस गए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने रूस से कच्चे तेल पर 30 से 40 फीसदी तक का डिस्काउंट मांगा था। उस खबर में बताया गया था कि रूस ने कोई डिस्काउंट देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि उसके भंडार में अभी मौजूद पूरे तेल की बिक्री हो चुकी है। गैस पाइपलाइन के मामले ने रूस ने पाकिस्तान से कहा था कि वह पहले पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन (पीएसजीपी) के बारे में अपने वायदों को पूरा करे। ये पाइपलाइन कराची से लाहौर तक बिछाई जानी है।
द न्यूज के मुताबिक मलिक के नेतृत्व में गए दल ने रूस के सामने पीएसजीपी के मॉडल में बदलाव का प्रस्ताव रखा। लेकिन रूस ने इसे नामंजूर कर दिया। रूस ने कहा कि यह प्रोजेक्ट सरकारों के बीच आपसी सहमति के तहत बनना है और इस मॉडल में बदलाव नहीं किया जा सकता। उसने कहा कि शेयरहोल्डिंग के बारे में कुछ प्रावधान तय होने हैं, जिन्हें पाकिस्तान को जल्द ही अंतिम रूप देना चाहिए।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक मलिक ने सोमवार को जो दावे किए, अगर वे सही हैं, तो इसे रूस और पाकिस्तान के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति माना जाएगा।