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संकट में नेपाल सरकार: अब CPN-UML सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर, संसद में शक्ति परीक्षण का सामना करेंगे PM प्रचंड

Mon, 27 Feb 2023 04:31 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

सरकार से गठबंधन वापस लेने की जानकारी सीपीएन-यूएमएल के डिप्टी चेयरमैन बिशनु पौडेल  ने दी है। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह पार्टी की बैठक हुई, जिसमें सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया।  
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नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' - फोटो : cmprachanda.com
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विस्तार
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नेपाल में राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक संकट गहरा गया है। दो माह पहले ही सत्ता संभालने वाली प्रचंड सरकार मुश्किलों में घिर गई है। दरअसल, नवगठित सरकार की अहम साझेदार और केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल ने सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का एलान कर दिया है। सीपीएन-यूएमएल  द्वारा सरकार से समर्थन लेने के कारण बीते साल दिसंबर के आखिर में बनी मौजूदा सरकार ने अपना बहुमत खो दिया है। ऐसे में प्रचंड सरकार को संसद में शक्ति परीक्षण का सामना करना पड़ेगा और एक महीने के भीतर विश्वास मत हासिल करना होगा।  

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सीपीएन-यूएमएल के डिप्टी चेयरमैन बिशनु पौडेल  ने दी जानकारी
सरकार से गठबंधन वापस लेने की जानकारी सीपीएन-यूएमएल के डिप्टी चेयरमैन बिशनु पौडेल  ने दी है। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह पार्टी की बैठक हुई, जिसमें सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी बताया कि सीपीएन (यूएमएल) के सभी मंत्री भी संघीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देंगे।

हमने मतभेदों के बावजूद कोशिश की- पौडेल  
सीपीएन-यूएमएल के डिप्टी चेयरमैन बिशनु पौडेल  ने कहा कि हमने (माओवादी केंद्र के साथ) मतभेदों के बावजूद सरकार को बचाए रखने और सरकार को समर्थन जारी रखने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक अलग रास्ते पर जाने का प्रयास किया। इसलिए हमने सरकार से अपना समर्थन वापस लेने और बाहर निकलने का फैसला किया।
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विदेश मंत्री की अचानक यात्रा रद्द करना भी एक वजह
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने विदेश मंत्री की स्विटज़रलैंड की निर्धारित यात्रा को रोक दिया। इतना ही नहीं, उन्हें पद से बर्खास्त करने का भी संदेश हमें दिया गया। प्रधानमंत्री प्रचंड ने विदेश मंत्री बिमला राय पौडयाल के संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक उच्च स्तरीय सत्र में भाग लेने के लिए जिनेवा की निर्धारित यात्रा को अचानक रद्द कर दिया। बता दें कि विदेश मंत्री बिमला राय पौडयाल यूएमएल से हैं। वे एक विशेषज्ञ के रूप में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पांच सदस्यीय नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए जाने वाली थीं। अब उनकी जगह उप प्रधान मंत्री नारायण काजी नेपाल का प्रतिनिधित्व करेंगे।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी वापस लिया था समर्थन
इससे पहले शनिवार को, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी समर्थन वापस लेने का फैसला किया था। वह सीपीएन (माओवादी सेंटर) द्वारा नेपाली कांग्रेस सहित पार्टियों के साथ आठ दलों के गठबंधन से बाहर हो गई थी। 

स्थिति से निपटने के लिए क्या कहता है नेपाल का संविधान?
ताजा संकट से निपटने के लिए नेपाल के संविधान में जो व्यवस्था है वह यह है कि अनुच्छेद 100 के खंड 2 के अनुसार, एक प्रधानमंत्री को फिर से विश्वास मत लेने की आवश्यकता होगी यदि कोई राजनीतिक दल गठबंधन से टूट गया हो या सरकार से समर्थन वापस ले लिया हो। ऐसे में प्रधानमंत्री को 30 दिनों के भीतर विश्वास मत हासिल करना होगा। यदि प्रधान मंत्री विश्वास मत को विफल करते हैं तो प्रधान मंत्री पद खो देंगे।  

कब तक है समय सीमा
सीपीएन-यूएमएल द्वारा प्रचंड सरकार से बाहर होने के बाद अब नेपाल के पीएम दहल को इस साल 26 मार्च तक दोबारा  फ्लोर टेस्ट का सामना करना होगा। इससे पहले 10 जनवरी को दहल ने फ्लोर टेस्ट का सामना किया था, जहां उन्होंने 99 फीसदी वोट हासिल किए थे। उनके पक्ष में 268 वोट पड़े थे, यह नेपाल के संसद के इतिहास में पहली बार था कि किसी भी प्रधानमंत्री ने संसद में 99 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए थे।  

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