नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल इस रविवार को चीन की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे की घोषणा की है। मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, खनाल 14 से 17 जून 2026 तक चीन के दौरे पर रहेंगे। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने उन्हें इस यात्रा के लिए न्योता दिया है।
बीजिंग में शिशिर खनाल और वांग यी के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी। इस दौरान दोनों नेता नेपाल और चीन के संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। वे आपसी हित के मुद्दों और सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर बात करेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान खनाल चीन के कुछ अन्य उच्च स्तरीय नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
शिशिर खनाल ने मार्च के अंत में विदेश मंत्री का पद संभाला था। पद संभालने के बाद उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। वे पिछले हफ्ते पांच जून को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के निमंत्रण पर दिल्ली पहुंचे थे। भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई थी।
भारत में हुई बैठक में दोनों विदेश मंत्रियों ने आपसी संबंधों की समीक्षा की। इसमें विकास कार्य, कनेक्टिविटी, व्यापार, ऊर्जा और लोगों के बीच आपसी रिश्तों जैसे विषय शामिल थे। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और ट्रेनिंग जैसे क्षेत्रों में हो रही प्रगति पर संतोष जताया। दोनों देश अपने रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सहमत हुए।
इस दौरे पर भारत और नेपाल के बीच आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता समझौते (MLAA) को लागू करने की प्रक्रिया पूरी हुई। यह समझौता सीमा पार होने वाले अपराधों की जांच और कानूनी कार्यवाही में मदद करेगा। इसके अलावा, भारत ने नेपाल को 72 स्वास्थ्य केंद्र और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं सौंपीं। ये सभी निर्माण कार्य 2015 के भूकंप के बाद भारत की मदद से पूरे किए गए हैं।
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डिजिटल क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाया गया। भारत के यूपीआई (UPI) और नेपाल के एनपीआई (NPI) को आपस में जोड़ा गया। इससे दोनों देशों के बीच पैसा भेजना आसान हो जाएगा। साथ ही, काठमांडू यूनिवर्सिटी और डिजिटल इंडिया भाषिणी के बीच एक समझौता हुआ। यह समझौता भाषा अनुवाद के लिए डिजिटल ढांचा तैयार करने में मदद करेगा।
अपनी भारत यात्रा के दौरान खनाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की थी। नेपाल भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति का एक प्रमुख हिस्सा है। इस दौरे ने दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत की परंपरा को और मजबूत किया है।