भारत के साथ नक्शा विवाद शुरू करने के बाद अब नेपाल ने अपना रुख बदलते हुए कहा है कि उसने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने इस पर समय से प्रतिक्रिया नहीं दी। ये बातें नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में कहीं।
उन्होंने कहा, हमने कई बार अपने भारतीय मित्रों से औपचारिक रूप से सीमा से संबंधित इन समस्याओं को सुलझाने के लिए कूटनीतिक बातचीत शुरू करने के लिए कहा। हमने इसके लिए संभावित तारीखों का भी सुझाव दिया लेकिन भारत की ओर से हमारे प्रस्ताव पर समय से जवाब नहीं दिया गया।
गोरखा भर्ती को ज्ञावल ने बीते जमाने की विरासत बताते हुए कहा कि यह नेपाली युवाओं के लिए विदेश जाने के लिए खुला पहला दरवाजा था। बीते समय में इसने रोजगार के कई अवसर उत्पन्न किए, लेकिन बदली परिस्थितियों में कई प्रावधानों पर सवाल उठ रहे हैं। 1947 का त्रिपक्षीय समझौता निरर्थक हो गया है।
वहीं, भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर भी नेपाल के विदेश मंत्री ने अपनी राय रखी। ज्ञावल ने कहा कि भारत और चीन के संबंध कैसे रहते हैं और वे अपने मतभेदों को किस तरह से हल करते हैं, इसका एशिया के भविष्य पर सीधा असर पड़ेगा।
नेपाल ने अपना नए नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल ने अपने क्षेत्र में शामिल कर लिया है। इस नक्शे को नेपाल की संसद से भी मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, इसे गलत बताते हुए नेपाल के ही कई नेता विरोध दर्ज करा चुके हैं।